पनियाली गदेरे में अतिक्रमणकारियों को केवल नोटिस देने तक सिमटा सिस्टम
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : कुछ वर्ष पूर्व सरकार ने अतिक्रमण की जद में आए नदी नालों को अतिक्रमण मुक्त करने के निर्देश दिए थे। लेकिन, बीते दिन उत्तरकाशी के धराली में लगातार आ रही आपदा ने सरकारी गलियारों से जारी आदेशों की कलई खोल दी। एक बार फिर आदेश जारी हुए हैं कि नदी-नालों के किनारे निर्माण नहीं होंगे। लेकिन, सवाल यह उठ रहा है कि जहां नदी-नाले पूरी तरह निर्माण की भेंट चढ़ चुके हैं, क्या सिस्टम उस अतिक्रमण को हटाने की जहमत उठाएगा।
बात कोटद्वार नगर के मध्य से गुजरने वाले पनियाली गदेरे की करें तो यहां सिस्टम ने 156 ऐसे लोगों को नोटिस जारी किए हैं, जो खतरे की जद में हैं। लेकिन, कार्यवाही के नाम पर महकमा प्रतिवर्ष वर्षाकाल से पूर्व नोटिस भेजने की खानापूर्ति तक संभव है। लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार रेंज के जंगलों से निकल पनियाली गदेरा नगर के मध्य से होता हुआ सुखरो नदी में मिलता है। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के समीप से गदेरा नगर निगम क्षेत्र में प्रवेश करता है। इसके बाद शिवपुर, आमपड़ाव, मानपुर, सिताबपुर, काशीरामपुर, कौड़िया क्षेत्रों से होता हुआ खोह नदी तक पहुंचता है। जंगल से जैसे ही यह गदेरा शहर में प्रवेश करता है, गदेरे का आकार सिकुड़ने लगता है। इसका मुख्य कारण गदेरे में लगातार बढ़ता अतिक्रमण है। दरअसल, वर्षा के दौरान उफान पर बने पनियाली गदेरे पर वर्षा के जल को निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती। जिससे पानी भारी मलबे को लेकर आबादी में घुस जाता है। इससे आबादी क्षेत्र को भारी नुकसान झेलना पड़ता है।
नोटिस तक सिमटा सरकारी तंत्र
पनियाली गदेरे को अतिक्रमण मुक्त करने के नाम पर सरकारी सिस्टम केवल नोटिस व अतिक्रमण चिह्रित करने तक ही सीमित है। 2017 में आई प्राकृतिक आपदा के बाद सिंचाई विभाग ने पनियाली गदेरे में आमपड़ाव से कौड़िया के मध्य 130 अतिक्रमण चिह्नित किए। लेकिन, किसी भी अतिक्रमण को हटाया नहीं गया। 2023 में पुन: विभाग ने अतिक्रमण चिह्निकरण की कार्रवाई करते हुए 156 अतिक्रमण चिह्नित किए। लेकिन, पूर्व की भांति इस मर्तबा भी विभाग अतिक्रमणकारियों को नोटिस देने तक ही सिमट कर रह गया। वर्तमान में गदेरे पर 165 से अधिक अतिक्रमण मौजूद हैं।
पनियाली गदेरे में हुए हादसे
1. वर्ष 1988 में पनियाली गदेरे में आई बाढ़ से दो लोगों की मौत। गदेरे से सटे क्षेत्रों में भारी नुकसान
2. वर्ष 1993-94 में गदेरे में आई बाढ़ से निचले क्षेत्रों में कई घरों में पानी भर गया। कोई जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन लोगों को काफी आर्थिक नुकसान हुआ।
3. 16 सितंबर 2012 को सूर्या नगर में बनी पुलिया के कारण गदेरे का पानी सूर्या नगर व कौड़िया क्षेत्र में भरा, भारी नुकसान।
4. अगस्त 2017 को पनियाली गदेरे से आई बाढ़ के कारण सात लोगों की मौत, पूरे क्षेत्र में जलभराव, हजारों घरों में भरा मलबा।
5. अगस्त 2018 में पनियाली गदेरे के ऊफान पर आने के बाद कई घरों में मलबा घुसा, एक महिला की मौत।
6. जुलाई 2019 में घर में गदेरे का पानी भर जाने के बाद सामान बाहर निकाल रहे तीन युवकों की करंट लगने से मौत।
7. सात अगस्त 2023 में पनियाली गदेरे ने कौड़िया क्षेत्र में जमकर उत्पात है। गदेरे के तेज बहाव में गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर के विक्टोरिया क्रास विजेता गबर सिंह कैंप को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने वाली पुलिया बह गई। साथ ही कुछ आवासों को भी नुकसान पहुंचा।