गंगटोक,सिक्किम में लगातार हो रही बारिश के बीच भूस्खलन की एक और बड़ी घटना सामने आई है। पश्चिम सिक्किम के ग्यालशिंग जिले के रिंबी गांव में पहाड़ से अचानक भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा नीचे आ गिरा। इसकी चपेट में आने से कई मकान और सरकारी आवास क्षतिग्रस्त हो गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, भूस्खलन और बारिश के कारण कम से कम 50 परिवार बेघर हो गए हैं। हालांकि, घटना में फिलहाल किसी व्यक्ति की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है।
पिछले 24 घंटे से इलाके में लगातार बारिश हो रही थी। इसी दौरान पहाड़ी का एक हिस्सा भरभराकर नीचे आ गया और मिट्टी, पत्थर तथा मलबे ने देखते ही देखते बस्ती के एक हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। अचानक आए मलबे के कारण गांव में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। कई परिवारों के घरों को भारी नुकसान पहुंचा है।
भूस्खलन से प्रभावित लोगों में स्थानीय पत्रकार सूरज सुब्बा भी शामिल हैं। बताया गया है कि इस आपदा में उनका नया मकान पूरी तरह तबाह हो गया। कई परिवारों के लिए यह घटना इसलिए भी बेहद पीड़ादायक है, क्योंकि वर्षों की मेहनत से बनाए गए उनके घर और जीवनभर की जमा-पूंजी कुछ ही पलों में मलबे में बदल गई। घरों के साथ लोगों की वर्षों पुरानी यादें और जरूरी सामान भी बर्बाद हो गए।
इस बीच, उत्तर सिक्किम के प्रमुख पर्यटन स्थल लाचेन को हाल ही में पर्यटकों और आम वाहनों के लिए फिर से खोल दिया गया है। अक्टूबर 2023 की शुरुआत में दक्षिण ल्होनक झील के ऊपर बादल फटने के बाद तीस्ता नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने उत्तर सिक्किम के बड़े हिस्से को प्रभावित किया था। बाढ़ से चुंगथांग बांध समेत कई इलाकों में सड़कें, पुल और संचार व्यवस्था बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी।
आपदा के बाद सुरक्षा कारणों और बड़े पैमाने पर हुए नुकसान के चलते लाचेन लंबे समय तक पर्यटकों के लिए बंद रहा। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटन पर निर्भर कारोबार को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। क्षेत्र में सामान्य आवागमन बहाल करने के लिए सेना, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ-ग्रीफ) और सिक्किम प्रशासन ने व्यापक स्तर पर काम किया।
इस वर्ष फरवरी तक सामान्य यातायात व्यवस्था बहाल करने के प्रयास किए गए थे। हालांकि, 5 अप्रैल को एक बार फिर भूस्खलन के कारण ‘तारम चूÓ सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद सड़क को दोबारा दुरुस्त करने का काम तेज गति से शुरू किया गया और 29 अगस्त तक इसे ठीक कर लिया गया। इसके बाद लाचेन को पर्यटकों और आम वाहनों के लिए फिर से खोलने का रास्ता साफ हुआ।
लगातार बारिश और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए सिक्किम के पर्वतीय इलाकों में लोगों और प्रशासन के सामने अब भी चुनौती बनी हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त मकानों और बुनियादी ढांचे का आकलन तथा राहत एवं पुनर्वास कार्य को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत है।