हरिद्वार। गंगा की स्वच्छता और निर्मलता को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्थिति में नालों और गदेरों का गंदा पानी गंगा में नहीं जाना चाहिए। इसके लिए संबंधित विभागों को तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। जिला कार्यालय सभागार में मंगलवार को आयोजित जिला गंगा संरक्षण समिति की 72वीं बैठक में गंगा संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों की विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने जल संस्थान सहित सभी संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों द्वारा कूड़ा-कचरा, पुराने कपड़े एवं अन्य अपशिष्ट सामग्री फेंकने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। सभी प्रमुख घाटों पर साइन बोर्ड लगाए जाएं और लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार अपील की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। हरकी पैड़ी क्षेत्र को लेकर भी प्रशासन ने विशेष सख्ती दिखाई है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि घाटों और पुलों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराने को कहा गया है। उन्होंने पुलों पर सुरक्षा जालियां लगाने के कार्य में तेजी लाने के भी निर्देश दिए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आगामी धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए गंगा घाटों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।