छात्र मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं को आत्मसात करें

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जयन्त प्रतिनिधि।
थलीसैंण : राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय थलीसैण के हिंदी विभाग के तत्त्वावधान में महान कथाकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर प्राचार्य डॉ. योगेन्द्र चंद्र सिंह की अध्यक्षता में विशेष व्याख्यान एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा एवं साहित्य को और अधिक मजबूत बनाना, विद्यार्थियों में साहित्य के प्रति अभिरुचि जागृत करना तथा आधुनिक परिप्रेक्ष्य में प्रेमचंद जी की प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श करना था। संगोष्ठी में प्रेमचंद जी के कालजयी विचारों और उनके प्रसिद्ध कथन “अन्याय का विरोध न करना भी अन्याय सहना ही जितना बड़ा अपराध है” पर गहन मंथन हुआ। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज के यथार्थ, शोषित एवं वंचित वर्ग की संवेदनाओं को उजागर करता है और आज के दौर में भी समाज को दिशा दिखाने में पूरी तरह सक्षम है। इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. विमल कुकरेती, डॉ. रोशनी असवाल, डॉ. छाया, डॉ. बच्चन सिंह बिष्ट ने अपने सारगर्भित विचारों से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने छात्रों को प्रेमचंद जी की रचनाओं को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अतुल सिंह ने किया।

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