जयन्ती पर स्वामी योगानन्द महाराज को किया याद

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। आर्य समाजी, उत्तराखंड में भूदान आंदोलन के प्रणेता, भारतरत्न आचार्य विनोवा भावे के भूदान आंदोलन के साथी, साम्ययोग मिसन न्यास उर्लिकांचन पुणे के संस्थापक, गांधीवादी, सर्वोदयी, स्वामी योगानन्द महाराज की 92वीं जयंती पर उन्हें श्रीद्धंजलि अर्पित की गई। योगानंद महाराज मूल रूप से ग्राम जसपुर, थलीसैण, गढ़वाल के रहने वाले थे।
आर्य गिरधारी लाल महर्षि दयानंद ट्रस्ट के पदमपुर स्थित कार्यालय में आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए सर्वोदय सेविका श्रीमती शशिप्रभा रावत ने कहा कि स्वामी योगानन्द ने गांधी-विनोवा का जीवन जिया, उनका मानना था कि जब ईश्वर ने पेट दिया है तो उसको भरने के लिए अन्न भी चाहिए और अन्न उपजाने के लिए भूमि चाहिये, जब उन्हें आर्य समाज धामावाला देहरादून के पुस्तकालय में “भूदान” आंदोलन सम्बन्धी विनोवा की पुस्तक मिली तो उनकी मुराद पूरी हो गई और वे विनोवा के पवनार आश्रम वर्धा जा पहुंचे। आश्रम से उन्हें देश भ्रमण के “भूदान यात्रा” के लिए विनोवा ने रवाना करा, फिर स्वामी ने पीछे मुड़कर नही देखा। उत्तराखंड सर्वोदय मंडल के प्रदेश सचिव सुरेन्द्र लाल आर्य ने कहा कि स्वामी का मानना था कि “मानव को मानव ही रहने दो, उसे जाती पाती, धर्म, सम्प्रदाय की बेड़ियों में मत जकड़ों”। इसी उद्देश्य के लिए उन्होंने उर्लिकांचन पुणे में “विश्व मानव चेतना केंद्र” की स्थापना की। ट्रस्ट के संरक्षक चक्रधर शर्मा “कमलेश” की अध्यक्षता में गोष्ठी का संचालन कैप्टन रिटायर पीएल खंतवाल ने किया। इस अवसर पर शूरबीर खेतवाल, सत्यप्रकाश थपलियाल, बचन सिंह गुसाईं, बीर सिंह, जनार्दन प्रसाद ध्यानी, प्रवेश नवानी, ओमप्रकाश बड़थ्वाल आदि मौजूद थे।

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