कोटद्वार में सार्वजनिक शौचालयों की दशा दयनीय

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार।
स्वच्छता के विस्तार में सार्वजनिक शौचालयों की भागीदारी कितनी जरूरी है इस बात से हम सभी वाकिफ है, लेकिन इसकी बदहाली से होने वाली परेशानी नगर निगम की लापरवाही और उदासीनता को दर्शाता है। शहर में कई ऐसे बदहाल सार्वजनिक शौचालय है, जिनकी मरम्मत तो उसे देखने वाला कोई नहीं है। राजकीय बेस अस्पताल के बाहर बनाये गये महिला सार्वजनिक शौचालय में नगर निगम अभी तक दरवाजा तक नहीं लगा पाया है। दरवाजा न होने के कारण शौचालय का प्रयोग नामुमकिन है।
पूर्व में नगर निगम क्षेत्र में महिलाओं और पुरूषों के लिए कई जगहों पर सार्वजनिक शौचालय बनाये गये थे, लेकिन देखरेख के अभाव में यह शौचालयों की दशा दयनीय बनी हुई है। दरअसल जरूरत के हिसाब से शहर में शौचालयों की संख्या बेहद कम है, लेकिन जहा कहीं भी इसकी सुविधा है उसकी हालत खस्ता है। सफाई और रखरखाव की कमी के चलते इसका इस्तेमाल लोगों के लिए चुनौती है। नगर निगम की ओर से बदरीनाथ मार्ग पर राजकीय बेस अस्पताल के बाहर महिलाओं के लिए सार्वजनिक शौचालय बनाया गया है। लेकिन अभी तक निगम द्वारा शौचालय में दरवाजा तक नहीं लगाया गया है। जिस कारण अस्पताल आने वाली महिलाएं शौचालय का प्रयोग नहीं कर पा रही है। बेस अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों महिलाएं उपचार कराने आती है, लेकिन शौचालय की हालत दयनीय होने से उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से दूर-दराज से आने वाली महिलाओं को बहुत परेशानी होती है। बेस अस्पताल में उपचार कराने आई संगीता ने बताया कि नगर निगम ने बेस अस्पताल के बाहर महिलाओं के लिए शौचालय तो बना दिया, लेकिन दरवाजा लगाना भूल गया। ऐसे में इस शौचालय का महिलाएं उपयोग नहीं कर पा रही है। नगर निगम को शौचालय में जल्द से जल्द दरवाजा लगाना चाहिए, ताकि महिलाएं उसका प्रयोग कर सकें। इसके अलावा नगर निगम के बाकी शौचालयों की स्थिति भी बेहद खराब है। शौचालयों का रखरखाव ठीक ढंग से नहीं होता। कई शौचालयों में तो पानी की व्यवस्था तक नहीं है। जिस कारण पूरे क्षेत्र में बदबू रहती है। खासकर गर्मी के दिनों में बदबू के कारण शौचालय के आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है।
नगर निगम के नगर आयुक्त पीएल शाह का कहना है कि बेस अस्पताल के बाहर बनें महिला शौचालय में जल्द ही दरवाजा लगा दिया जाएगा। कर्मचारियों को शौचालय की नियमित सफाई करने के लिए कहा जाएगा।

रोज शहर में आते हैं हजारों लोग

कोटद्वार। नगर निगम के चालीस वार्डो सहित दुगड्डा, जयहरीखाल ब्लॉक के अलावा जनपद बिजनौर उत्तर प्रदेश के दर्जनों गांवों के हजारों लोग विभिन्न कार्यों से कोटद्वार शहर में आते है। जितनी आबादी दूसरे जगहों से आती है उसके हिसाब सार्वजनिक शौचालयों की संख्या बेहद कम है। भीड़-भाड़ वाले जगहों में नाम मात्र के सार्वजनिक शौचालय हैं। शौचालय इस कदर गंदे होते हैं कि उसके आसपास से गुजरना भी मुश्किल होता है। हर कोई उस शौचालय का प्रयोग नहीं कर सकता।


इस्तेमाल लायक नहीं है शौचालय
कोटद्वार।
शहर में ज्यादातर सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है। वहां नियमित सफाई न होने से लोग शौचालय जाने से कतराते हैं। सबसे बदतर हालत बेस अस्पताल के बाहर बनें शौचालय और नगर निगम के ऑडिटोरियाम में बने शौचालय की है। शौचालय से न सिर्फ तेज बदबू आती है बल्कि पानी की व्यवस्था नहीं है। ज्यादातर लोग दीवार पर ही पेशाब करते हैं। बेस अस्पताल के बाहर शौचालय में दरवाजा न होने से महिलाएं तो वहां के शौचालय में जाती ही नहीं हैं।

शौचालयों की बदहाली के लिए लोग भी जिम्मेदार
कोटद्वार।
सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली के लिए लोग भी कम जिम्मेदार नहीं है। लोग टायलेट का इस्तेमाल कर फ्लश तक चलाना जरूरी नहीं समझते। इसके अलावा सीट को भी अक्सर तोड़ देते हैं। बहुत से लोग टायलेट की दीवार पर सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू और पान का पीक थूकते हैं। शौचालय की हर दो घंटे पर सफाई होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता। यही वजह है कि सार्वजनिक शौचालय दिन प्रतिदिन बदहाल होते जा रहे हैं।

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