पुरोला सीट से जो विधायक बना, विपक्ष में बैठा

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उत्तरकाशी। पुरोला उत्तराखण्ड की पहली विधान सभा है जो अनुसुचित जाति के लिए राज्य गठन से ही सुरक्षित है। यहां पर उत्तराखण्ड के 2002 के पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर मालचंद ने 13209 मत प्राप्त कर बाजी मारी, जबकि उत्तराखण्ड में तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी। पहले आम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मालचंद के प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व विकास मंत्री स्व़ बरफियालाल जुवांठा की पत्नी शांति जुवांठा थी। कांग्रेस की शांति जुवांठा को 10238 मत पाकर हार गईं। 2007 में भाजपा ने अमृत नागर को प्रत्याशी बनाया तो भाजपा से टिकट कटने पर मालचंद ने पार्टी से बगावत की और निर्दलीय चुनाव लड़े जंहा बहुत कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा। वहीं कांग्रेस ने पूर्व पर्वतीय विकास मंत्री स्व़ बरफियालाल जुवांठा के सुपुत्र राजेश पर दांव खेल बाजी अपने पक्ष में की। राजेश जुवांठा ने कांग्रेस से जीत तो हासिल की लेकिन प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी और विपक्ष में रहना पड़ा। 2012 के विधानसभा चुनाव में मालचंद दुबारा पार्टी में शामिल होते हुए भाजपा के टिकट से चुनाव मैदान में थे और 18098 मत प्राप्त कर पुन: जीत हासिल कर दुबारा विधायक बने जबकि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राजकुमार को 14266 तथा कांग्रेस से राजेश जुवांठा को 10804 मत, बसपा के किशन लाल को 2000 से भी कम मत प्राप्त कर हार का सामना करना पड़ा। वहीं प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने से भाजपा के मालचंद को जीत हासिल करने के बावजूद विपक्ष में रहना पड़ा।
वर्ष 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पुन: मालचंद पर भरोसा कर उन्हें चुनाव मैदान में खड़ा किया जिसमें 16785 मत मालचंद, निर्दलीय प्रत्यासी दुर्गेश लाल 13508 मत, बसपा के रामलाल को 679 मत तथा भाजपा से बगावत कर कांग्रेस में शामिल हुए राजकुमार को 17798 मत प्राप्त कर भाजपा के प्रत्याशी को 1013 मतों से पराजित कर जीत हासिल की। वहीं प्रदेश में त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी और राजकुमार को विपक्ष में बैठना पड़ा। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार जनता के रूझान से यही पुनरावृति होने के संकेत नजर आ रहे हैं।

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