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नियमित और अनुकंपा नियुक्ति के लिए अलग अलग पे स्केल नहीं हो सकते : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में कहा है कि नियमित नियुक्ति और अनुकंपा नियुक्ति कर्मचारियों के लिए दो भिन्न पे स्केल नहीं हो सकते। कोर्ट ने कहा कि जैसे ही कोई व्यक्ति एक निश्चित पद पर नियुक्त किया जाता है, वह व्यक्ति उस पद का वेतनमान पाने का अधिकारी होता है चाहें वह अनुकंपा नियुक्ति के आधार पर ही क्यों न नियुक्त हुआ हो। यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी और प्रदेश सरकार को हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पति की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति में आफीसर आन स्पेशल ड्यूटी नियुक्त की गई महिला को उस पद के लिये तय वेतनमान देने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने महिला को आफीसर आन स्पेशल ड्यूटी पद पर नियुक्ति तो दी थी लेकिन उसे उस पद के लिए तय वेतनमान से कम वेतन दिया जा रहा था। महिला को 6500-10500 का वेतनमान दिया जा रहा था जबकि इस पद के लिए निर्धारित वेतनमान 8000 – 13500 रुपये था।
हाईकोर्ट ने आफीसर आन स्पेशल ड्यूटी पद के लिए निर्धारित वेतनमान दिलाए जाने की महिला की मांग स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को 8000 – 13500 का वेतनमान देने का निर्देश दिया था। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एमआर शाह न्यायमूर्ति व बी़ वी़ नागरत्ना की पीठ ने दिसंबर माह के शुरूआत में दिये आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका खारिज करते हुए उपरोक्त बात कही।
इस मामले में राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि महिला की अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति सृजित अतिरिक्त पद पर की गई है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया था कि आफीसर आन स्पेशल ड्यूटी पद पर तो अनुकंपा नियुक्ति दी ही नहीं जा सकती। कोर्ट ने प्रदेश सरकार की यह दलील खारिज करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने ही महिला को अनुकंपा नियुक्ति में आफीसर आन स्पेशल ड्यूटी पद पर नियुक्ति दी है, अब राज्य सरकार यह दलील नहीं दे सकती। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति और नियमित नियुक्ति के कर्मचारियों के लिए दो भिन्न वेतनमान नहीं हो सकते।

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