ट्रेंचिंग ग्राउंड के लिए भूमि उपलब्ध कराना वन मंत्री की नैतिक जिम्मेदारी 

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। नगर निगम के पार्षदों ने कुछ पार्षदों पर ट्रेंचिंग ग्राउण्ड के लिए भूमि दिये जाने की मांग को लेकर बेवजह राजनीति करने का आरोप लगाया। साथ ही महापौर पर लगाये गये आरोपों की भत्र्सना की। उन्होंने कहा कि ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए भूमि उपलब्ध कराना राज्य सरकार का दायित्व है, न कि महापौर का। यदि नगर निगम के पास टे्रंचिंग ग्राउण्ड के लिए भूमि होती तो राज्य सरकार से मांग करने का सवाल नहीं उठता। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय विधायक के पास इस समय वन मंत्रालय भी है, लेकिन ऐसी कौन सी परिस्थिति है जो वन मंत्री ट्रेंचिंग ग्राउंड के लिए भूमि देने में आनाकानी कर रहे हैं। वन विभाग के मुखिया होने के नाते वन मंत्री की भी ट्रेंचिंग ग्राउंड के लिए भूमि उपलब्ध कराना नैतिक जिम्मेदारी बनती है, लेकिन कुछ पार्षद नासमझ बनकर जानबूझकर मामले को उलझाने का प्रयास कर रहे है, जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है।
नगर निगम के पार्षद गीता नेगी, विपिन डोबरियाल, विजेता रावत, प्रवेन्द्र सिंह रावत, अमित नेगी, सुखपाल शाह, रोहणी देवी, जगदीश मेहरा, सोनिया नेगी, बीना देवी, अनिल नेगी, अनीता मल्होत्रा, राकेश बिष्ट, पिंकी देवी, गिंदी दास, कवित्ता मित्तल, नईम अहमद, सूरज प्रसाद कांति, हरीश नेगी, अंजुम सबा, अनिल रावत, विवेक शाह ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में नगर निगम के कुछ पार्षदों पर ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए भूमि दिये जाने की मांग को लेकर घटिया राजनीति करने का आरोप लगाया। पार्षदों ने कहा कि नगर निगम बोर्ड गठन होने पर सबसे पहले बोर्ड बैठक में सभी पार्षदों ने कूड़ा निस्तारण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार को भेजा था। कूड़ा निस्तारण के लिए भूमि दिये जाने की मांग को लेकर महापौर के नेतृत्व में नगर निगम के बाहर दो सप्ताह तक आंदोलन भी किया गया। इसके अलावा ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए भूमि दिये जाने की मांग को लेकर शासन स्तर पर महापौर के द्वारा लगातार पत्राचार किया जा रहा है। नगर निगम द्वारा भूमि के लिए ऑनलाईन प्रस्ताव भेजा गया है। पार्षदों ने कहा कि वर्तमान में नगर निगम के पास कोई भी भूमि उपलब्ध नहीं है, जितनी भी भूमि है वह राजस्व विभाग या फिर वन विभाग के अधीन है।

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