उत्तराखंड राज्य में अब कार्मिकों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जायेगी

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। 8 अगस्त 1994 को पौड़ी गढ़वाल में आन्दोलनकारियों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच ने कहा कि इस घटना के विरोध में जिस प्रकार उत्तराखंड का समूचा कार्मिक समुदाय राज्य प्रप्ति के आन्दोलन में कूद पड़ा था आज उसी तर्ज पर अपने सेवा सम्बन्धी बुनियादी सवालों के प्रति जवाबदेही के लिए समूचे कार्मिक समुदाय को एक मंच पर आने की जरूरत है। शहीदों के सपने के रूप में आवाज दो हम एक हैं के नारे को धरातल पर साकार करने के लिए संकल्पबद्ध एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि शहीदों की शहादत और कार्मिकों की बगावत से बने उत्तराखंड राज्य में अब कार्मिकों की उपेक्षा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हर हाल में जवाबदेही सुनिश्चित करायी जायेगी।
मंच के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पाण्डे ने कहा कि उत्तराखंड के इतिहास में आठ अगस्त का आज का दिन क्रांति दिवस के रुप में दर्ज है। पौड़ी से हुई इस क्रान्ति की शुरुआत के बाद अपनी कुर्सी को दांव में लगाकर 94 दिन तक सड़कों पर संघर्ष करने वाले कार्मिक अपने बुनियादी सवालों को लेकर सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैए से हैरान हैं। उन्होंने समूचे कार्मिक समुदाय से जवाबदेही के लिए एकता हेतु छेड़े गए  जनजागरण अभियान को सफल बनाने का आह्वान किया। एकता मंच के मंडलीय संयोजक सीताराम पोखरियाल ने बताया कि जनजागरण अभियान के तहत गंगोत्री से गंगा जल का कलश लेकर सभी जनपदों में एकता यात्रा व विचार गोष्ठी आयोजित की जाएगी। हर रविवार को वेबिनार की जा रही है और एक अक्टूबर को देहरादून स्थित शहीद स्थल में खुली विचार गोष्ठी कर दो अक्टूबर को रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्थल में शहीदों को श्रृद्धांजलि अर्पित की जायेगी।

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