नई दिल्ली । किरण बेदी ने कहा, ‘उनको आप रोक नहीं सकते, हर एक की अपनी फीलिंग है, हर एक की अपनी नीड है, अपनी डिमांड है, अपना इंट्रेस्ट भी है, अपनी प्लानिंग भी है, अपना विजन भी है, वो आप नहीं रोक सकते।’ बीते दिनों दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शन को लेकर पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उप-राज्यपाल किरण बेदी का कहना है कि केंद्र सरकार को अपना उत्तरदायित्व निभाते हुए जेन-जी की आवाज को सुनना चाहिए और उसमें से रचनात्मक बातों पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हम सरकार पर भरोसा नहीं करेंगे तो फिर किस पर करेंगे, क्योंकि वही अंतिम ऑथोरिटी है। वहीं आंदोलन के दौरान बहुत से जेन-जी युवाओं द्वारा प्रधानमंत्री के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने को लेकर उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से, यह अब हमारी संस्कृति का हिस्सा बन गया है। उन्होंने कहा कि इस्तेमाल की जा रही भाषा एक बड़े चलन को दिखाती है जिसे अब ज्यादा बर्दाश्त किया जा रहा है।
किरण बेदी ने ये सारी बातें एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहीं। इस दौरान जब पूर्व पुलिस अधिकारी से पूछा गया कि क्या उन्हें सरकार की मंशा पर भरोसा है, तो उन्होंने कहा, ‘अगर हम सरकार पर भरोसा नहीं करेंगे, तो फिर किस पर करेंगे? वे ही अंतिम ऑथोरिटी हैं और वे कार्रवाई भी कर रहे हैं। उन्होंने तुरंत टास्क फोर्स बनाई और उसमें बहुत काबिल लोगों को शामिल किया। लेकिन सवाल यह है कि इसे सिर्फ टेस्टिंग तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इससे शिक्षा में बड़े सुधार होने चाहिए। इसका विस्तार वहां तक होना चाहिए।’
‘आप उनकी मांगों को आलोचना ना समझें’
आगे जब उनसे अपनी मांगों को लेकर जेन-जी के सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सरकार को नसीहत देते हुए कहा, ‘उनको आप रोक नहीं सकते, हर एक की अपनी भावनाएं हैं, हर एक की अपनी जरूरत है, अपनी मांग है, अपना रूचि भी है, अपनी योजना भी है, अपना विजन भी है, जिसे आप नहीं रोक सकते, आपको सिर्फ प्रतिक्रिया देना होगा और देखना होगा कि ये जो मांगें कर रहे हैं, क्या कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं, और उनकी मांगों को आप आलोचना ना समझें। उनकी मांगें, उनकी जरूरतों को आलोचना ना समझें, उसको डील करें।’
बेदी ने केंद्र सरकार को दी नसीहत
आगे उन्होंने कहा ‘इसलिए मेरा ख्याल है कि एक जिम्मेदार सरकार को बहुत उत्तरदायी होनी चाहिए, कि सोशल मीडिया में कौन से विचार आ रहे हैं, कौन से विचार सही हैं, सही दिशा में हैं, और कौन से विचार रचनात्मक हैं और कौन से विचार विनाशकारी हैं। सरकार को केवल रचनात्मक विचार के साथ डील करना चाहिए, और जो विनाशकारी हैं, उसका जवाब देना चाहिए।’
पीएम के लिए अपमानजनक भाषा को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
उधर सीजेपी द्वारा 20 जुलाई को किए गए प्रोटेस्ट के दौरान जेन-जी द्वारा प्रधानमंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने को लेकर किरण बेदी ने कहा, ‘दुर्भाग्य से यह अब कल्चर (संस्कृति) बन गया है, वो जो भी बोल रहे थे ये आधुनिक कल्चर (संस्कृति) है, जिसे अब बर्दाश्त भी किया जा रहा है।’
‘माता-पिता व बड़ों के पैर छूने की परंपरा अब खत्म हो रही’
आगे बेदी ने कहा, ‘ये अब उनकी जुबान नहीं रही, बल्कि ऐसी भाषा सामाजिक बातचीत और सार्वजनिक बैठकों में आम हो चुकी है, और इसे बर्दाश्त भी किया जा रहा है। ये एक लैंग्वेज बन चुकी है।’ साथ ही उन्होंने कहा कि ‘युवा पीढ़ी द्वारा बड़ों के प्रति पारंपरिक रूप से दिखाया जाने वाला सम्मान धीरे-धीरे कम हो रहा है, यहां तक कि मां-बाप के पांव छूना, बड़ों की इज्जत करना, वो भी अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।’
‘समय रहते इस्तीफा ले लेते तो बात इतनी आगे नहीं बढ़ती’
वहीं पूर्व शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा, ‘इस मामले को इतना आगे तक ला दिया गया, कि इतनी आगे आने की जरूरत नहीं थी। मुझे पता चला है कि जब ये मुद्दा बहुत बढ़ गया था तो उस वक्त उन्होंने (धर्मेंद्र प्रधान) इस्तीफे की पेशकश की थी, तो अगर पेशकश की थी तो उसे स्वीकार कर लेना था। उस वक्त स्वीकार कर लेते तो बात वहीं खत्म हो जाती, इसमें ईगो बीच में नहीं आना चाहिए था। ये नौबत यहां तक नहीं आती। उस वक्त तक काफी नुकसान हो चुका था, घर-घर तक नीट का मामला पहुंच गया था। नुकसान दिख भी रहा था।’ इसके बाद पूर्व पुलिस अधिकारी ने एक अंग्रेजी कहावत का जिक्र किया ‘स्टिचेज टाइम, सेव्स नाइन’ (किसी फटे कपड़े में सही समय पर लगाया गया एक टांका, बाद में नौ टांके लगाने से आपको बचा सकता है) और कहा कि, ‘अगर आप समय पर इस्तीफा ले लेते, तो इस हद दूर आने की जरूरत नहीं थी।’