सोलन के युवा ने बिना मिट्टी-पानी उगाया केसर; इस तकनीक से किया कमाल, शूलिनी सैफरॉन दिया नाम

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सोलन, एजेंसी। सोलन के एक होनहार युवा ने बिना मिट्टी व पानी के केसर की खेती कर एक नया आयाम स्थापित किया है। सोलन के युवा गौरव सभरवाल ने अपने घर पर अनूठी एयरोपॉनिक तकनीक से शूलिनी सैफरॉन के नाम से केसर उगाने का कारनामा कर दिखाया है। बिजनेसमैन से किसान बने गौरव सभरवाल ने बताया कि वह केसर के बीज कश्मीर से लाए थे। इस खेती के बारे में उन्होंने हरियाणा से प्रशिक्षण लिया था। उन्होंने पीएमजी स्कीम के तहत यह प्रोजक्ट शुरू किया है। ग्रेजुएशन तक पढ़ाई करने वाले गौरव ने बताया कि केसर की खेती करने में करीब दस लाख रुपए निवेश किए हैं। उन्होंने एयरोपॉनिक तकनीक की मदद से केसर को उगाया है। शुरुआती दौर में उन्होंने पहले कश्मीर जाकर केसर की जानकारी ली और उसके बाद सोलन शहर में ही इसकी खेती करने के बारे में सोचा।
उन्होंने कहा कि परिवार से उन्हें काफी सपोर्ट मिला, जिस कारण वह यह प्रयास सफल कर पाए। गौरव ने कहा कि यदि युवा चाहे तो कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन सही रास्ता चुनना बेहद जरूरी है। गौरव सभरवाल ने कहा कि यदि कोई केसर की खेती के बारे में जानना चाहता है, तो व उनसे प्रशिक्षण लेने के लिए संपर्क कर सकते हैं। बता दें कि केसर की खेती के लिए आमतौर पर कश्मीर को जाना जाता है, लेकिन अब सोलन शहर में इसकी खेती की गई है। बाजार में केसर की कीमत तीन लाख रुपए प्रति किलो के आसपास है। जानकारी के अनुसार केसर एक प्रकार के फूल से निकाला जाता है और इसमें काफी मेहनत भी लगती है। बाजारों में केसर काफी महंगा बिकता है और इस वजह से यहां के लोगों के लिए यह वरदान है। गौरतलब रहे कि केसर काफी काम आता है, इसे क्रोकस सैटाइवस नाम के एक फूल से निकाला जाता है। केसर का वैज्ञानिक नाम भी क्रोकस सैटाइवस है और इस मसाले का इस्तेमाल कलर एजेंट के रूप में किया जाता है। केसर उगाने के लिए गुटिकाएं प्रति वर्ष अगस्त-सितंबर माह में बोए जाते हैं, जो दो-तीन महीने बाद अर्थात नवंबर-दिसंबर तक इसके पत्र तथा पुष्प साथ निकलते हैं। इसके पुष्प की शुष्क कुक्षियों को केसर, कुंकुम, जाफरान अथवा सैफरॉन कहते हैं। इसमें अकेले या दो से तीन की संख्या में फूल निकलते हैं। इसके फूलों का रंग बैंगनी, नीला एवं सफेद होता है। ये फूल कीपनुमा आकार के होते हैं। इनके भीतर लाल या नारंगी रंग के तीन मादा भाग पाए जाते हैं। इस मादा भाग को वर्तिका (तंतु) एवं वर्तिकाग्र कहते हैं। (एचडीएम)

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