-रक्षा मंत्री ने पत्रादेवी में हुतात्मा स्मृति स्मारक का उद्घाटन किया
पणजी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा मुक्ति आंदोलन में बलिदान देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात सेनानियों को इतिहास में उचित सम्मान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गोवा की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले एक भी शहीद का नाम इतिहास में छूटना नहीं चाहिए। सरकार को व्यापक शोध कर सभी शहीदों के नाम और उनके योगदान का पता लगाना चाहिए तथा उनके नाम स्मारक पर अंकित किए जाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान को हमेशा याद रखें।
रक्षा मंत्री ने गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत से भी इस दिशा में विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री स्वयं इस कार्य की निगरानी करेंगे और गोवा की मुक्ति के लिए बलिदान देने वाले किसी भी सेनानी की कुर्बानी को भुलाया नहीं जाएगा।
राजनाथ सिंह ने बुधवार देर शाम महाराष्ट्र और गोवा की सीमा पर स्थित पत्रादेवी में पुनर्विकसित हुतात्मा स्मृति स्मारक का उद्घाटन किया। पत्रादेवी पुर्तगाली शासन से गोवा की मुक्ति के लिए चले ऐतिहासिक संघर्ष का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने गोवा मुक्ति आंदोलन के उन वीर सत्याग्रहियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश की एकता और गोवा की मुक्ति के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि गोवा मुक्ति आंदोलन केवल किसी एक क्षेत्र का संघर्ष नहीं था, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय चेतना, एकता और अखंडता की सशक्त अभिव्यक्ति था।
रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय एकता क्षेत्रीयता, सांप्रदायिकता और जातिवाद जैसी संकीर्ण सोच से कहीं ऊपर है। पत्रादेवी यह संदेश देती है कि भारत में अलग-अलग क्षेत्रीय, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान होने के बावजूद भारतीय होना वह साझा सूत्र है, जो सभी देशवासियों को एकजुट करता है।
उन्होंने कहा कि पत्रादेवी के सत्याग्रहियों ने अपने साहस और दृढ़ संकल्प से यह साबित किया कि भारत शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा सकता है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि जब किसी संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता के सामने गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाए और शांतिपूर्ण प्रयासों की सीमाएं समाप्त हो जाएं, तब राष्ट्र को अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए पूरी शक्ति का इस्तेमाल करने का अधिकार है।
राजनाथ सिंह ने नवनिर्मित स्मारक की सराहना करते हुए कहा कि यह गोवा मुक्ति आंदोलन के शहीदों की सच्ची स्मृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराने के संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों ने बलिदान दिया था।
उन्होंने कहा कि अब यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बलिदान देने वाले एक भी शहीद का नाम इतिहास से न छूटे। इसके लिए व्यापक शोध किया जाए, सभी शहीदों के नाम और उनके योगदान का पता लगाया जाए तथा उनके नाम पत्थरों पर अंकित किए जाएं, ताकि उनका स्मरण हमेशा बना रहे।
रक्षा मंत्री ने कहा कि गोवा की मुक्ति के लिए अलग-अलग क्षेत्रों और वर्गों के लोग एकजुट होकर आगे आए थे। इस पूरे संघर्ष के पीछे एक ही भावना थी कि हम सब एक हैं और हम भारतीय हैं।
रक्षा मंत्री की अपील का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि गोवा की आजादी के संघर्ष का इतिहास केवल वर्ष 1946 से शुरू नहीं होता। पुर्तगाली शासन के खिलाफ गोमांतकियों का संघर्ष इससे कई दशक पहले से चल रहा था।
मुख्यमंत्री ने कुनकल्ली के ऐतिहासिक विद्रोह का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह पुर्तगाली शासन के खिलाफ गोमांतकियों के प्रतिरोध का एक महत्वपूर्ण अध्याय था।
उन्होंने कहा कि गोवा की मुक्ति के संघर्ष का पूरा इतिहास सामने लाने के लिए सभी शहीदों और उनके योगदान पर शोध करना, उनका दस्तावेजीकरण करना और उपलब्ध रिकॉर्ड को सुरक्षित करना जरूरी है।
प्रमोद सावंत ने कहा कि राज्य सरकार गोवा की आजादी के लिए बलिदान देने वाले प्रत्येक नायक के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए व्यापक शोध अभियान शुरू करेगी।
इस अभियान के तहत शहीदों के योगदान से संबंधित ऐतिहासिक तथ्यों और दस्तावेजों को एकत्र किया जाएगा तथा उनका व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य गोवा मुक्ति आंदोलन के इतिहास को व्यापक रूप से सामने लाना और उन सभी ज्ञात-अज्ञात सेनानियों को उचित सम्मान देना है, जिन्होंने गोवा की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।