किशाऊ बांध बना तो जलमग्न होगी 4,250 बीघा उपजाऊ जमीन

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चकराता/ देहरादून। प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना को लेकर क्वानू क्षेत्र के ग्रामीणों में चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बांध का निर्माण संभरखेड़ा क्षेत्र में किया जाता है, तो क्वाणू क्षेत्र के कोटी, मैलोत और मंझगांव सहित आसपास की करीब 4,250 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि जलमग्न हो सकती है। ग्रामीणों के अनुसार क्वाणू क्षेत्र लंबे समय से अपनी उन्नत कृषि पैदावार के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी मात्रा में टमाटर, मक्का और गेहूं की खेती होती है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था काफी हद तक खेती पर निर्भर है और कृषि भूमि के डूबने से रोजगार तथा ग्रामीणों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।
खेती ही नहीं, पूरी ग्रामीण
अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
ग्रामीणों का कहना है कि क्वानू की जमीन केवल खेत नहीं, बल्कि कई परिवारों की पीढ़ियों से चली आ रही आजीविका का आधार है। किसानों के मुताबिक यहां की जमीन कृषि उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और हर साल बड़ी मात्रा में टमाटर समेत अन्य फसलों का उत्पादन होता है।
किसानों का दावा है कि क्षेत्र से उत्पादित टमाटर दिल्ली समेत अन्य मंडियों तक पहुंचता है और इससे ग्रामीणों को करोड़ों रुपये की आय होती है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि प्रस्तावित बांध के कारण खेत डूबे तो कृषि के साथ-साथ उनकी वर्षों पुरानी आर्थिक व्यवस्था भी प्रभावित होगी।
बांध स्थल बदलने की मांग
किशाऊ बांध संघर्ष समिति से जुड़े ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से प्रस्तावित बांध स्थल पर पुनर्विचार करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बांध के लिए कोई ऐसा विकल्प संभव हो जिससे उपजाऊ कृषि भूमि कम से कम प्रभावित हो, तो उस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि परियोजना से प्रभावित होने वाले क्षेत्र की कृषि भूमि, किसानों की आजीविका, मकानों और पुनर्वास का विस्तृत आकलन कराया जाए।
अकाल में भी यहां नहीं हुई खेती की कमी
ग्रामीणों का कहना है कि क्वानू क्षेत्र की मिट्टी और कृषि क्षमता ऐसी रही है कि कठिन परिस्थितियों में भी यहां लोगों को खेती से सहारा मिलता रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में पीढ़ियों से खेती-बागवानी होती आई है और यही उनकी प्राथमिक आजीविका रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास परियोजनाओं का विरोध करना उनका उद्देश्य नहीं है, लेकिन विकास के साथ स्थानीय लोगों की जमीन, आजीविका और भविष्य को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
सरकार से स्पष्ट नीति और पुनर्वास की मांग
ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि बांध परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित क्षेत्र के लोगों से संवाद किया जाए।
यदि परियोजना से कृषि भूमि प्रभावित होती है तो उचित मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और आजीविका के वैकल्पिक साधनों को लेकर स्पष्ट नीति सामने रखी जाए।
क्वानू के ग्रामीणों का सवाल है-विकास जरूरी है, लेकिन क्या विकास की कीमत हजारों बीघा उपजाऊ जमीन और किसानों की पीढ़ियों पुरानी आजीविका देकर चुकाई जाएगी?

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