शिक्षक संतोष सिंह नेगी की पहल, हर साल करीब 50 बच्चों की पढ़ाई में करते हैं मदद
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि हौसला मजबूत हो तो मंजिल हासिल की जा सकती है। शिक्षक संतोष सिंह नेगी इसका जीवंत उदाहरण हैं। जन्म से 45 प्रतिशत दिव्यांगता, बचपन में मां और फिर पिता का निधन और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने ना केवल अपनी पढ़ाई जारी रखी, बल्कि आज जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा का सहारा बने हुए हैं। उनके लिए शिक्षक होना महज नौकरी नहीं, बल्कि समाज के भविष्य को संवारने का माध्यम है।

माता-पिता के निधन के बाद छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढ़ाई के साथ उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर परिवार की मदद की। इसके बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा का सपना नहीं छोड़ा। उन्होंने चार विषयों में परास्नातक किया और दो विषयों में नेट उत्तीर्ण किया। शिक्षा के क्षेत्र में पीएचडी की दिशा में भी आगे बढ़े। सरकारी शिक्षक बनने के बाद नेगी ने देखा कि ग्रामीण और गरीब परिवारों के कई बच्चे केवल आर्थिक अभाव के कारण पढ़ाई से दूर हो जाते हैं। किसी के पास फीस के पैसे नहीं हैं तो किसी के पास किताब, यूनिफार्म, जूते या स्कूल बैग नहीं। उन्होंने ऐसे बच्चों की मदद का बीड़ा उठाया। अपने संसाधनों और समाज के सहयोग से वह हर साल करीब 50 जरूरतमंद विद्यार्थियों की शिक्षा में सहायता करते हैं। उनका प्रयास रहता है कि आर्थिक तंगी किसी बच्चे की पढ़ाई के आड़े न आए।
बेटियों के लिए आसान की स्कूल की राह
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी शिक्षक संतोष सिंह नेगी विशेष पहल की। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल की दूरी और आवागमन का साधन न होना कई बेटियों की पढ़ाई में बाधा बनता है। इसे देखते हुए उन्होंने जरूरतमंद विद्यार्थियों को करीब तीन लाख रुपये मूल्य की साइकिलें उपलब्ध कराईं। इनमें बड़ी संख्या छात्राओं की रही। साइकिल मिलने के बाद कई छात्राओं के लिए विद्यालय पहुंचना आसान हुआ। इससे उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिली और विद्यालय में छात्राओं की संख्या बढ़ाने के प्रयासों को भी बल मिला।