नई दिल्ली ,कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में इस विषय पर चर्चा चाहती, तो विपक्ष की मांग के साथ ही संसद में बहस की अनुमति दे देती। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
पत्रकारों से बातचीत में खरगे ने कहा कि विपक्ष शुरुआत से ही इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा चाहता था, लेकिन सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी। उनका आरोप था कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग किया गया और विपक्ष की बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं देते, तब तक इस मुद्दे पर समाधान की दिशा में आगे बढ़ना मुश्किल होगा।
खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इस पूरे मामले में उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की चिंताओं पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रही है।
इस बीच, कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने भी केंद्र सरकार के रुख की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि करोड़ों छात्रों की चिंताओं के बावजूद शिक्षा मंत्री को पद पर बनाए रखने का क्या कारण है। उनके अनुसार, सरकार को छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए जवाबदेही तय करनी चाहिए।
प्रियांक खरगे ने यह भी कहा कि सरकार छात्रों के साथ सीधे संवाद स्थापित करने में सफल नहीं रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री के विभिन्न छात्र संवाद कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में छात्रों की समस्याओं पर प्रभावी बातचीत की आवश्यकता है।
उल्लेखनीय है कि परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इस विषय पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है