-राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज अभियान पर साधा निशाना, कहा-निराशा फैलाने वालों के बीच भारत ने हासिल की तेज आर्थिक वृद्धि
बिश्केक,01 सितंबर (आरएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था की 7.8 प्रतिशत वृद्धि पर खुशी जताई। उन्होंने सामाजिक माध्यम मंच इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए देशवासियों को बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि देश की संकल्प शक्ति, मेहनत और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय युद्ध और विभिन्न वैश्विक संकटों से घिरी हुई है। आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित है और वर्ष 2020 में आए कोविड-19 संकट के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अभी तक पूरी स्थिरता नहीं आई है। इसके बावजूद भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है।
मोदी ने कहा, देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई। 7.8 प्रतिशत वृद्धि। देश खुशियों से भर गया, लेकिन मैं देशवासियों को बधाई देता हूं उनके संकल्प शक्ति, पुरुषार्थ के लिए, जो एक सामूहिक शक्ति का प्रतिबिंब है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक तरफ देश आर्थिक प्रगति कर रहा है, जबकि दूसरी ओर कुछ लोग निराशा में डूबे हुए हैं और चारों तरफ नकारात्मकता फैलाने में लगे हैं।
उन्होंने कहा, दूसरी तरफ निराशा की गर्त में डूबे हुए लोग, झूठ की गूंज, चारों तरफ निराशा फैलाने में लगे हुए हैं। इन सारी चीजों को पार करते हुए देश ने 7.8 प्रतिशत वृद्धि हासिल की है।
प्रधानमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के युवाओं से जुड़ने वाले ‘छात्रों की गूंजÓ अभियान पर भी कटाक्ष करते हुए इसे ‘झूठ की गूंजÓ बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश को आर्थिक विकास की मौजूदा गति को बनाए रखते हुए आगे बढ़ना होगा। इसके लिए भारत का आत्मनिर्भर बनना आवश्यक है। उन्होंने देशवासियों से स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि हमें ये गति बनाए रखनी है और आगे बढ़ना भी है। इसलिए आत्मनिर्भर भारत बनना बहुत जरूरी है। स्वदेशी का मंत्र पालन करना है।
मोदी ने लोगों से अनावश्यक विदेश यात्राओं पर खर्च करने से बचने और सोने की खरीदारी कम करने की अपनी अपील भी दोहराई।
केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान भारत के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह लगभग 7.5 प्रतिशत के अनुमान से बेहतर है।
आंकड़ों को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और चुनौतीपूर्ण व्यापारिक परिस्थितियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।