गत वर्षाकाल में पहाड़ी से आए मलबे ने आमसौड़ में मचाई थी तबाही
लगातार हो रही वर्षा ने एक बार फिर बढ़ाई ग्रामीणों की चिंता
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : मानसून की दस्तक के साथ दुगड्डा ब्लाक के आमसौड़ गांव के ग्रामीणों की चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं। वर्षा होते ही ग्रामीणों की आंखों के सामने गत वर्ष हुई तबाही के भयावह दृश्य ताजा हो उठे हैं। दिनभर ग्रामीणों की निगाहें गांव के ऊपर स्थित केलापानी की खतरनाक पहाड़ी पर टिकी रहती हैं, जबकि रातें डर और आशंका के बीच जागकर कट रही हैं। ग्रामीणों को हर पल इस बात का भय सता रहा है कि कहीं फिर से भूस्खलन या मलबा गांव पर कहर न बरपा दें। लगातार शिकायत के बाद भी सरकारी सिस्टम ने ग्रामीणों के विस्थापन की सुध नहीं ली।
गत वर्ष वर्षाकाल आमसौड़ गांव के ऊपर स्थित केलापानी की पहाड़ी से भारी मलबा आ गया था। मलबा कई घरों के अंदर घुस गया था। जबकि, हाईवे के किनारे स्थित एक भवन का हिस्सा मलबे की जद में आकर ध्वस्त हो गया था। इस मलबे व बोल्डर के कारण गांव का दशकों पुराना प्राकृतिक स्रोत भी ध्वस्त हो गया था। कई दिनों की मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने घरों से मलबा तो साफ कर दिया था। लेकिन, पहाड़ी से लगातार बोल्डर गिरने का खतरा बना हुआ था। ऐसे में सरकारी सिस्टम ने खतरे की जद में आने वाले 15 परिवारों को अन्यत्र शिफ्ट कर दिया था। पूरे वर्षाकाल के दौरान ग्रामीण अपने घरों से दूर अन्यत्र शरण लेकर रहे। इसके बाद ग्रामीण लगातार उनके विस्थापन की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों का कहना था कि पहाड़ी से आ रहे बोल्डर व मलबे के कारण उन्हें हर वर्षाकाल जान-माल का खतरा बना रहेगा। लेकिन, सरकारी सिस्टम ने उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। नतीजा, आज भी ग्रामीण वर्षाकाल के दौरान खतरे की जद में आए अपने भवनों में रह रहे हैं। खतरे के कारण गांव से लगातार पलायन का दौर भी जारी है। गांव के ऊपर स्थित पहाड़ी कब तबाही मचा दें कुछ कहा नहीं जा सकता।
एनएच पर भी मंडरा रहा खतरा
आमसौड़ के ऊपर झवाणा की पहाड़ी से लगातार हो रहे भूस्खलन से राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी खतरा मंडरा रहा है। पहाड़ी से आ रहे मलबे व बोल्डर के कारण हाईवे पर भी यातायता प्रभावित हो रहा है। वहीं, आमसौड़ से जमरगड्डी-धरियालसार के लिए जाने वाले पीएमजीएसवाई के मार्ग को भी पहाड़ी से खतरा बना हुआ है। ऐसे में कई ग्रामीण उक्त मार्ग पर आवाजाही करने से भी घबरा रहे हैं।
लगातार उठा रहे विस्थापन की मांग
वर्षाकाल में भूस्खलन की मार झेल रहे आमसौड़ के ग्रामीण पिछले लंबे समय से विस्थापन की मांग उठा रहे हैं। इसके लिए ग्रामीणों ने गांव के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बैठकर धरना भी दिया था। लेकिन, अब तक हालात जस के तस बने हुए हैं। हालांकि, सरकारी सिस्टम ने ग्रामीणों को गांव के ऊपर बोल्डर व मलबे को रोकने के लिए योजना तैयार करने का आश्वासन दिया था। लेकिन, यह आश्वासन भी धरातल पर नजर नहीं आ रहा।