मणिपुर में 3 चर्च नेताओं की हत्या, 38 बंधक बनाए गए, 28 रिहा

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इंफाल,राष्ट्रपति शासन हटने और नई सरकार बनने के बावजूद मणिपुर में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। इस हफ्ते 3 चर्च नेताओं की हत्या के बाद कई लोगों को बंधक बना लिया गया था। इनमें से कम से कम 28 लोगों को रिहा कर दिया गया है, लेकिन अब भी करीब 20 लोग अपहरणकर्ताओं के चंगुल में हैं। इनकी सुरक्षित रिहाई के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
दरअसल, 13 मई को कांगपोकपी में संदिग्ध उग्रवादियों ने 3 बैपटिस्ट चर्च नेताओं की गोली मारकर हत्या कर दी थी और 4 लोगों को घायल कर दिया। इसके बाद खबरें आईं कि नगा समुदाय के कम से कम 10 लोगों को बंधक बना लिया गया है। इसके जवाब में कथित रूप से कुकी समुदाय ने भी कुछ लोगों को बंधक बना लिया। यानी दोनों समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे के लोगों को बंधक बना लिया।
तीनों कुकी चर्च नेता अपने ड्राइवर के साथ चुराचांदपुर से कांगपोकपी जा रहे थे, तभी उनकी गाड़ी पर नगा विद्रोही समूह जेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट के संदिग्ध सशस्त्र उग्रवादियों ने हमला कर दिया। मारे गए लोगों में रेव वी सितल्हौ भी शामिल थे, जो थाडौ बैपटिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष और मणिपुर बैपटिस्ट कन्वेंशन के पूर्व महासचिव थे। अन्य पीड़ितों की पहचान रेव कैगौलुन, पास्टर पाओगौलन और ड्राइवर लेलन के रूप में हुई।14 मई को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया था कि उग्रवादियों द्वारा बंधक बनाई गईं कोंसाखुल गांव की 12 नगा महिलाओं को माखान गांव में मुक्त कराया गया। इसके अलावा सेनापति जिले में बंधक बनाए गए कुकी समुदाय के 14 लोगों, जिनमें 4 पुरुष और 10 महिलाएं शामिल हैं, को भी देर रात सुरक्षा बलों को सौंप दिया गया। डॉन बॉस्को से जुड़े 2 लोगों, जिनमें एक नागालैंड का निवासी है, को भी अलग से रिहा किया गया।
बंधकों की सही संख्या अभी सामने नहीं आई है, लेकिन बताया जा रहा है कि अभी भी कम से कम 20 लोग अपहरणकर्ताओं की गिरफ्त में हैं। इनमें कुकी-जो समुदाय के 14 और नगा समुदाय के 6 लोग हैं। अधिकारियों ने बताया कि कल यानी 16 मई को सुरक्षा बलों ने अपहृत 6 नगा लोगों की तलाश में कांगपोकपी जिले में अभियान शुरू किया था। फिलहाल संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
मणिपुर के 2 उपमुख्यमंत्री- लोसी डिको और नेमचा किपगेन बंधकों की रिहाई करने के लिए बातचीत की अगुवाई कर रहे हैं। डिको नगा और नेमचा कुकी-जो समुदाय से हैं। हालांकि, दोनों उपमुख्यमंत्री, गृह मंत्री, पुलिस और चर्च नेताओं द्वारा विभिन्न स्तरों पर की गई बातचीत से अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है। अधिकारियों ने बताया कि चर्च नेता, नागरिक समाज संगठन, सेना, पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों भी सक्रिय हैं।
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