उत्तराखंड

चरस की तस्करी के दोषी को 4 साल की सजा

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रुद्रप्रयाग। ऊखीमठ ब्लक के रांसी गौंडार और मनसूना क्षेत्र में अवैध चरस की तस्करी में एक व्यक्ति को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए 4 साल करावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार के अर्थदंड से भी दंडित किया है। विशेष न्यायाधीश श्रीकान्त पाण्डे ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। मामले में सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुदर्शन चौधरी एवं सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आशीष नेगी द्वारा पैरवी की गई। 22 जनवरी 2022 को वादी उप निरीक्षक विजय प्रताप राही अपने सहयोगी कर्मचारियों के साथ उच्च अधिकारियों के निर्देशों पर अवैध शराब आदि की तलाशी के लिए ऊखीमठ क्षेत्र में तैनात थे। मुखबिर द्वारा वादी को सूचना दी गई कि रांसी गौंडार क्षेत्र में कुछ लोग चरस की तस्करी कर रहे हैं। साथ ही बताया कि यदि तलाशी की जाए तो यह पकड़ में आ सकते हैं। मुखबिर की इसी सूचना पर भरोसा करते हुए सभी कर्मचारी उप निरीक्षक विजय प्रताप राही के नेतृत्व में ऊखीमठ-रांसी मोटर मार्ग पर मनसूना बाजार से करीब 400 मीटर पहले आने-जाने वाले वाहनों और व्यक्तियों की तलाशी करने लगे। कुछ समय बाद मनसूना की ओर से एक व्यक्ति आता दिखाई दिया, किंतु वह चेकिंग टीम को तलाशी लेता देख तेज कदमों से दूसरी दिशा की ओर जाने लगा। चेकिंग टीम ने शक होने पर उसका पीछा किया और 20-25 कदमों की दूरी पर उसे रोक लिया। उक्त व्यक्ति से भागने का कारण पूछा गया तो उसने माफी मांगते हुए अपने पास चरस होने की बात बताई। साथ ही बताया कि वह इसे बेचने ऊखीमठ बाजार जा रहा है। पुलिस द्वारा पूछने पर उक्त व्यक्ति ने अपना नाम दिनेश भट्ट पुत्र शेर सिंह ग्राम रांसी वोसाल थाना ऊखीमठ जनपद रुद्रप्रयाग बताया। अभियुक्त को धारा 50 एनडीपीएस के प्रावधानों की जानकारी दी गई। जबकि अभियुक्त की सहमति पर राजपत्रित अधिकारी पुलिस उपाधीक्षक हर्षवर्धन सुमन के मौके पर पहुंचने के बाद बाद अभियुक्त की तलाशी ली गई। अभियुक्त से 436 ग्राम अवैध चरस बरामद हुई। अभियुक्त को उसके द्वारा किए गए अपराध की जानकारी देते हुए हिरासत में लिया गया। मय माल सहित अभियुक्त को थाना ऊखीमठ लाया गया। जहां उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में मामला पंजीत किया गया। साथ ही अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायालय द्वारा अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया तथा अभियुक्त से बरामद 436 ग्राम माल को विधि विज्ञान प्रयोगशाला देहरादून भेजा गया। विवेचक द्वारा मामले में संपूर्ण विवेचना के बाद अभियुक्त दिनेश भट्ट के विरुद्घ आरोप पत्र में न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। जबकि विधि विज्ञान प्रयोगशाला देहरादून से प्राप्त रिपोर्ट में अभियुक्त से बरामद माल का चरस होने की पुष्टि हुई है। विवेचना के दौरान अभियुक्त पक्ष की ओर से कुल 5 गवाहों को न्यायालय में परिक्षित कराए गए। सभी गवाहों द्वारा घटना का पूर्ण समर्थन किया गया। शनिवार को विशेष न्यायाधीश श्रीकान्त पांडे की अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अभियुक्त को दोषी करार देते हुए 4 साल के कठोर करावास की सजा सुनाई। जबकि दस हजार के अर्थदंड से दंडित किया है। सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुदर्शन चौधरी एवं सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आशीष नेगी द्वारा पैरवी की गई।

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