संपादकीय

अभी उन्नीस दिन और परीक्षा

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आखिर जैसी उम्मीद थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैसी ही घोषणा की। देश में नियंंत्रिण कोरोना की महामारी को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से लॉकडाउन की सीमा उन्नीस दिन के लिए और बढा दी गयी। यह एक बेहद सकारात्मक कदम है जिसे पूरा देश चाह रहा था। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस बार लॉकडाउन का कहीं अधिक सख्ती से पालन किया जाए। हिंदुस्तान आगामी तीन मई तक लॉकडाउन में ही रहेगा। प्रधानमंत्री ने एक जिम्मेदार अभिभावक की तरह देश के लोगों से उन्नीस दिन के लॉकडाउन का अनुशासन के तहत के पालन करने का आग्रह किया है। जाहिर है कि दूसरे देशों की अपेक्षा भारत ने कोरोना की महामारी को बेहद सजगता से नियंत्रित किया है और इस समय यह बेहद जरूर हो गया था कि लॉकडाउन की अवधि को कुछ और समय के लिए बढ़ाया जाए। अब हमारे लिए यह बेहद जरूरी हो गया है कि हम लॉकडाउन के नियमों का बेहद गंभीरता से पालन करें ताकि एक भी नया मरीज अब देखने में न आए। अब यह हमारी जिम्मेदारी है जिस धैर्य एवं अनुशासन के साथ हमने 21 दिन के लॉकडाउन का पालन किया है उसी तरह से आगामी उन्नीस दिन भी बिताए जाएं। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात बातों पर साथ मांगा है जिसमें घर के बुजुर्गो का ध्यान रखने, लक्ष्मण रेखा का पालन करने एवं सरकारी एडवायजरी का सख्ती से पालन करने जैसी बातों का उल्लेख किया गया है। जाहिर है कि आगामी उन्नीस दिन में भी देश के आगे चुनौतियां अपार हैं। खासतौर से गरीब एवं जरूरतमंदों को भोजन की व्यवस्था करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा जिस प्रकार से इन 21 दिनों में लॉकडाउन का उल्लंघन किया गया है उससे अब निजात पानी होगी। इसके लिए यदि सुरक्षा बलों को सख्ती करनी पड़े तो अब इससे पीछे नहीं हटना चाहिए। खासतौर से कोरोना योद्घाओं जैसे हमारे डॉक्टर, नर्सेस, सफाई कर्मी, पुलिसकर्मी इन सभी का पूरा सम्मान जरूरी है। जो लोग कोरोना के लिए हमारे लिए लड़ रहे हैं, उनके साथ कैसे कोई अभद्रता कर सकता है। यह बेहद अभद्र व्यवहार है। सरकार द्वारा स्पष्ट किया जा चुका है कि जो क्षेत्र हॉटस्पॉट की श्रेणी में नहीं हैं उन्हें बीस अप्रैल के बाद कुछ छूट दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए कम से कम लापरवाही एवं हठधर्मिता का व्यवहार तो छोड़ना ही होगा, यानी की बीस अप्रैल तक कई स्थान अग्निपरीक्षा के दौर से गुजरेंगे। देश के लोगों के लिए प्रधानमंत्री की चिंता साफ बताती है कि वह नागरिकों की सुरक्षा के लिए आर्थिक पक्ष की भी अनदेखी करने के लिए तैयार हैं। यह भारत के लोगो का धैर्य एवं एकजुटता ही है कि विशाल जनसंख्या के बावजूद भी हम कोरोना के कहर को काफी हद तक रोक पाने में सफल हुए हैं।

उल्लेखनीय आंकड़े यह हैं कि जब भारत में कोरोना वायरस के सिर्फ 550 केस थे, तभी भारत ने 21 दिन के संपूर्ण लॉकडाउन का एक बड़ा कदम उठा लिया था। अब यह हमारा कर्तव्य है कि हम आगामी 19 दिन और एकजुटता का प्रदर्शन करें और कोरोना के कहर को खुद पर हावी न होने दें।

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