अल्मोड़ा। उत्तराखंड के अल्मोड़ा से स्वदेशी दिशा में काम कर रहे नवाचारी रवि टम्टा इन दिनों अपने हापिडा स्काईनेक्स प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा में हैं। व्यक्तिगत हवाई परिवहन की संभावनाओं को लेकर काम कर रहे रवि टम्टा ने नई दिल्ली में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू से मुलाकात कर अपने प्रोजेक्ट की तकनीक, भविष्य की संभावनाओं और आगे की परीक्षण एवं प्रमाणन प्रक्रिया को लेकर चर्चा की।मुलाकात के दौरान रवि टम्टा ने हापिडा स्काईनेक्स की कार्यप्रणाली और इसकी भविष्य की संभावनाओं के बारे में केंद्रीय मंत्री को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परियोजना का उद्देश्य केवल एक उड़ने वाला वाहन तैयार करना नहीं है, बल्कि भारत में सड़क आधारित परिवहन के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं को तलाशना भी है।
रवि टम्टा ने स्वदेशी तकनीक के माध्यम से व्यक्तिगत हवाई परिवहन का विकल्प विकसित करने की अपनी सोच भी मंत्री के सामने रखी। बातचीत में परियोजना के तकनीकी विकास के साथ उड़ान सुरक्षा, नियामकीय मानक, परीक्षण प्रक्रिया और संभावित प्रमाणन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
तीन मिनट की उड़ान ने
खींचा लोगों का ध्यान
हापिडा स्काईनेक्स प्रोजेक्ट की चर्चा उस समय और तेज हुई, जब अल्मोड़ा में इसके प्रोटोटाइप का उड़ान परीक्षण किया गया। 8 अगस्त को हुए परीक्षण के दौरान प्रोटोटाइप करीब तीन मिनट तक हवा में रहा और एचएनबी खेल स्टेडियम क्षेत्र में उड़ान भरी।
इस परीक्षण के बाद स्वदेशी तकनीक और व्यक्तिगत हवाई परिवहन को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।
परियोजना से जुड़े लोगों के मुताबिक, इस तरह के प्रोटोटाइप भारत में विकसित हो रही संभावनाओं को सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआती कदम हैं।
अब सुरक्षा परीक्षण और प्रमाणन पर रहेगा फोकस
हापिडा स्काईनेक्स परियोजना के लिए अब अगला चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रोटोटाइप को आगे के परीक्षणों तक ले जाने के लिए तकनीकी मूल्यांकन, उड़ान सुरक्षा परीक्षण और संबंधित नियामकीय प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा।
परियोजना के लिए ऊॅउअ के निर्धारित विमानन सुरक्षा एवं प्रमाणन मानकों का पालन महत्वपूर्ण रहेगा। किसी भी व्यक्तिगत हवाई वाहन को व्यापक स्तर पर संचालन के लिए आगे बढ़ाने से पहले संबंधित तकनीकी और नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करना जरूरी होगा।