जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से लैंसडौन वन प्रभाग की ओर से आमसौड़ स्थित राजकीय हाईस्कूल में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में ग्रामीणों से बांस के नए अंकुरों को न काटने की अपील की गई।

शिविर में उप प्रभागीय वनाधिकारी रजत कपिल ने विद्यार्थियों और ग्रामीणों को हाथियों के व्यवहार, उनके प्राकृतिक आवास के बारे में बताया। कहा कि हाथियों का प्रिय भोजन बांस है। लेकिन, कई लोग बांस के नए अंकुरों को काट देते हैं। यदि इन अंकुरों को बड़ी मात्रा में काटकर मानव उपयोग के लिए ले जाया जाता है, तो हाथियों के प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। वहीं, गांव के आसपास भोजन की तलाश में आने वाले हाथियों के साथ लोगों का आमना-सामना होने पर फसलों और जनजीवन को नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों और विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे हाथियों के प्राकृतिक भोजन और उनके आवागमन वाले क्षेत्रों से छेड़छाड़ न करें। बांस के नए अंकुरों की अवैध कटाई को रोकने में वन विभाग का सहयोग करें। वन्य जीव प्रेमी राजीव बिष्ट ने विद्यार्थियों ने हाथियों से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे और अपने अनुभव साझा किए। बताया कि हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मानव और वन्यजीवों के बीच बेहतर सह-अस्तित्व के लिए स्थानीय समुदाय की भागीदारी को आवश्यक बताया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों और नई पीढ़ी को यह संदेश देना रहा कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की साझी जिम्मेदारी है। हाथी कॉरिडोर और उनके प्राकृतिक भोजन स्रोतों का संरक्षण कर ही मानव-हाथी संघर्ष को प्रभावी रूप से कम किया जा सकता है।