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बर्फबारी से रुका हेमकुंड यात्रा पथ खोलने का कार्य

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देहरादून। पिछले दो दिनों से हो रही भारी बर्फबारी से हेमकुंड यात्रा पथ खोलने का कार्य रुक गया है। सेना की 418 इंडिपेंडेंट इंजीनियर कोर और 62 मीडियम रेजीमेंट के 24 जवान और अफसर दिन रात हेमकु़ंड के पैदल यात्रा पथ पर जमी बर्फ को हटाने के काम में जुटे हैं। बर्फ हटाने के टास्क का नेतृत्व इंजीनियरिंग के सूबेदार जगसीर सिंह कर रहे हैं। सेना के इस दल ने पूर्व में जमी बर्फ को बहुत हद तक हटा दिया था पर पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बर्फ से मंगलवार दोपहर बाद बर्फ हटाने का कार्य रोक दिया गया है। बुधवार को भी हेमकुंड में भारी हिमपात जारी रहा। गोविन्द घाट गुरुद्वारे के मुख्य प्रबंधक सेवा सिंह ने बर्फ हटाने में जुटी सेना का नेतृत्व कर रहे सूबेदार जगसीर सिंह ने बताया कि सेना ने पूर्व में गिरी बर्फ को अटलाकोटी ग्लेशियर प्वाइंट गिरी हटाने में कामयाबी हासिल कर दी थी और हेमकुंड साहिब तक 150 मीटर तक भी बर्फ हटा दी थी पर दो दिनों से लगातार गिर रही बर्फ से कार्य रुक गया है। हेमकुंड साहिब के कपाट दस मई को खोले जाने हैं।
बदरीनाथ धाम में बर्फबारी: बदरीनाथ धाम में जमकर बर्फ़बारी हुयी है। मंगलवार से जारी हिमपात बुधवार को भी जारी रहा। जिसके चलते धाम में लगभग एक फ़ीट से ज्यादा बर्फ़ जम चुकी है। बर्फबारी के कारण यात्रा तैयारियों को चाक- चौबंद करने के लिए गए जल संस्थान और नगर पंचायत के कर्मचारियों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नगर पंचायत के 21 सदस्यों के दल ने प्रथम चरण में मंदिर परिसर और अन्य स्थानों पर साफ़ सफ़ाई का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। अब दूसरे चरण में शीतकाल में बर्फ़बारी से क्षतिग्रस्त हुए मार्गों व स्थानों पर रिपेयरिंग कार्य व लाइटों का कार्य होना है। लेकिन धाम में ख़राब मौसम व बर्फ़बारी के चलते रुक गया है। बदरीनाथ नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी सुनील पुरोहित का कहना है कि प्रथम चरण में हमारे द्वारा मंदिर परिसर वबदरीनाथ धाम की साफ़ सफ़ाई का कार्य लगभग पूरा कर दिया गया है। दूसरे चरण में क्षतिग्रस्त मार्गों व लाइटों का काम होना है। कपाट खुलने से कुछ दिन पूर्व ही धाम में सभी व्यवस्थाओं को चाक चौबंद कर दिया जायेगा।
केदारनाथ धाम में हल्की बर्फबारी: रुद्रप्रयाग। बुधवार सुबह जिले के अनेक स्थानों पर बारिश हुई जबकि हिमालय की ऊंची पहाड़ियों पर हल्की बर्फबारी हुई। केदारनाथ सहित ऊंची पहाड़ियों में हल्की बर्फबारी हुई हालांकि यह ज्यादा देर ठहर नहीं सकी। बदले मौसम से लोगों को गर्मी के साथ ही धूल और धुंध से भी राहत मिली। खेती, बागवानी, पर्यावरण और पानी के लिए बारिश काफी लाभकारी साबित हुई। बताते चलें कि बीते कुछ दिनों से समय समय पर जिले में हल्की बारिश हो रही है जिससे बुरी तरह सूख रहे जलस्रोतों को भी रिर्चाज होने का अवसर मिल रहा है। उम्मीद की जा रही है कि यदि इसी तरह हल्की बारिश होती रहे तो जल संकट कुछ कम हो सकता है।

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