बेस अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों में कोरोना निकलने से लोगों में भय, ओपीडी में भारी गिरावट

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। कोटद्वार में कोरोना संकट के दौर में राजकीय बेस अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। हालांकि अनलॉक शुरू होने के बाद अस्पताल में मरीजों की संख्या में थोड़ा इजाफा भी हुआ है, लेकिन इन दिनों बेस अस्पताल के दो डॉक्टरों, दो स्टाफ नर्सों सहित 6 कर्मचारी व एक कपड़े धोने वाला ठेकेदार के कोरोना संक्रमित होने से अस्पताल की ओपीडी में भारी गिरवाट आई है। लोगों के अंदर डर पैदा हो गया कि अगर अस्पताल जायेगें तो उन्हें भी कोरोना हो सकता है।
बेस अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई जरूरी इंतजाम किये है। अस्पताल आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के हाथ को सेनेटाइज करवाया जा रहा है और मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है। इसके बावजूद मरीजों का डर दूर होता नहीं दिख रहा है। अनलॉक के बाद ओपीडी में जहां रोजाना 300 से 350 मरीज आते थे, वहीं यह संख्या अब लगभग 200 हो गई है। ओपीडी में कई ऐसे मरीज भी पहुंच रहे हैं, जो डॉक्टरों के पास जाने में भी डर रही हैं। बता दें कि बेस अस्पताल में कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र सहित दुगड्डा, जयहरीखाल, द्वारीखाल, रिखणीखाल, एकेश्वर, पोखड़ा ब्लॉक के अलावा जनपद बिजनौर के दर्जनों गांव के लोग उपचार कराने आते है। लेकिन कोटद्वार में कोरोना पॉजिटिवों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसके कारण आम मरीजों में भी भय बना हुआ है। जिसके चलते ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। सामान्य दिनों में बेस अस्पताल की ओपीडी 700 से 750 तक रहती है, लेकिन वर्तमान में ओपीडी 200 से 250 हो गई है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि लोग कोरोना के डर से अस्पताल में उपचार कराने नहीं जा रहे हैं। बल्कि वे डॉक्टर्स के निजी क्लीनिक पर पहुंचकर इलाज ले रहे हैं। आमतौर पर जुलाई और अगस्त महीने के उल्टी, दस्त, बुखार, जुकाम आदि के मरीज ज्यादा निकलते हैं। परिणामस्वरुप इन महीनों में बेस असप्ताल की ओपीडी से लेकर जनरल वार्ड में बेड फुल रहते हैं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। कोरोना के कारण लोग अस्पताल आना पसंद नहीं कर रहे हैं।
क्या कहते है प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक
राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार के प्रमुख अधीक्षक डॉ. वीसी काला ने बताया कि आजल ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में काफी गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि सोमवार को जहां ओपीडी में मात्र 53 लोग आये वहीं मंगलवार को लगभग 250 लोगों ने ही ओपीडी के लिए पंजीकरण कराया था। सोमवार को ओपीडी कम होने के पीछे रक्षाबंधन के त्योहार को मुख्य कारण माना जा रहा है।
इसलिए अस्पताल आने से बच रहे मरीज
सर्दी, खांसी, जुकाम होने पर लोग इस डर से अस्पताल नहीं आ रहे हैं कि कहीं उनका सैंपल लेकर उन्हें अस्पताल में क्वारंटाइन न कर दिया जाए। अन्य बीमारी होने पर लोग अस्पताल आने से इसलिए भी बच रहे हैं कि वहां कोरोना मरीज के संपर्क में आने से वे संक्रमित न हो जाए।
निजी क्लीनिकों पर लग रही भीड़
एक ओर इन दिनों जहां बेस अस्पताल की ओपीडी में मरीज दिख नहीं रहे हैं। वहीं शहर में डाक्टर्स के निजी क्लीनिकों पर मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। खास बात तो यह कि क्लीनिक पर मरीजों की भीड़ के चलते सोशल डिस्टेंसिंग का पालन तक नहीं हो पा रहा है।

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