नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर बड़ी कार्रवाई, 22 परीक्षाएं रद्द; 2628 अफसरों-कर्मियों की नौकरी खत्म होगी

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रांची । झारखंड में नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक सबसे बड़ी कार्रवाई की है। सीआईडी और एसआईटी की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार ने जेपीएससी और जेएसएससी की ओर से आयोजित 22 परीक्षाएं एक साथ रद्द कर दी हैं।
इन फैसलों से 2,628 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं। इनमें 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा से नियुक्त 342 अधिकारी, 54 फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, 63 एसडीपीओ, 237 महिला पर्यवेक्षिका और जेएसएससी-सीजीएल से नियुक्त 1,932 कर्मचारी शामिल हैं। ये सभी लोग अलग-अलग विभागों में नौकरी कर रहे थे या इनकी नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए थे।
सरकार ने छह अन्य परीक्षाओं की प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित कर दी है, जबकि वर्ष 2014 से लेकर अब तक आयोजित 17 भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच का आदेश दिया है। राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने मंगलवार रात 11.45 बजे इससे संबंधित कुल आठ अधिसूचनाएं जारी की हैं। विभाग के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचनाओं में बताया गया है कि ये फैसले सीआईडी और एसआईटी की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर लिए गए हैं।
सरकार के फैसले के तहत जेएसएससी की विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा यानी जेएसएससी-सीजीएल को रद्द कर दिया गया है। इस परीक्षा के माध्यम से 1,932 अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई थी। इसके अलावा झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा 2023 और 2025 की नियमित एवं बैकलॉग परीक्षाएं भी रद्द की गई हैं।
सरकार ने विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों की भर्ती, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर, पॉलिटेक्निक और महिला पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर तथा मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट सहायक प्रोफेसर की भर्ती से जुड़ी परीक्षाएं भी रद्द कर दी हैं। इसके अलावा सहायक निदेशक/वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ड्रग इंस्पेक्टर, सहायक वन संरक्षक, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, सहायक लोक अभियोजक और फूड सेफ्टी ऑफिसर से जुड़ी परीक्षाएं भी रद्द की गई हैं। झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी जेईटी-2024 को भी रद्द कर दिया गया है।
सरकार ने टीडीपीएल से जुड़ी वर्तमान भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने का निर्णय लिया है। इनमें विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों की भर्ती. सहायक निदेशक/वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी की नियमित और बैकलॉग भर्ती, ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर की बैकलॉग भर्ती, पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर की भर्ती और मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट सहायक प्रोफेसर की भर्ती शामिल हैं।
सरकार ने कुछ परीक्षाओं को रद्द करने के बजाय अगले आदेश तक स्थगित करने का फैसला किया है। इन परीक्षाओं की प्रारंभिक प्रक्रिया टीडीपीएल के अलावा दूसरी एजेंसियों के माध्यम से कराई गई थी। इनमें फूड एनालिस्ट, प्रोजेक्ट मैनेजर, डिप्टी डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन, डायरेक्टर, इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज और बॉयलर इंस्पेक्टर की नियुक्ति प्रक्रिया शामिल है। इन एजेंसियों की विश्वसनीयता और भूमिका की जांच सीआईडी को सौंपी गई है। जांच पूरी होने तक इन भर्तियों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।
सरकार ने पुरानी 17 परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने का भी फैसला लिया है। इनमें पांचवीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2013, सिविल जज की विभिन्न परीक्षाएं, मृदा संरक्षण अधिकारी, कृषि अधिकारी, फूड सेफ्टी ऑफिसर, डेंटिस्ट, भूविज्ञानी-रसायनज्ञ, सहायक अभियंता और डेंटल डॉक्टर समेत अन्य परीक्षाएं शामिल हैं।
सरकार ने जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए तीन महत्वपूर्ण फैसले भी लिए हैं। पहला, परीक्षाओं में कथित अनियमितता और कदाचार से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए झारखंड हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध किया जाएगा। दूसरा, जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षा प्रक्रिया और कामकाज पर निगरानी रखने के लिए आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ बनाया जाएगा। तीसरा, परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी।
समिति में राज्य के प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशकों को भी सदस्य बनाया जाएगा। समिति दोनों आयोगों की परीक्षा प्रणाली और पूरी प्रक्रिया का अध्ययन कर दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

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