कोलकाता ,पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार लगातार पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के फैसलों को पलट रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने ईद-उल-अजहा (बकरीद) की छुट्टियों को लेकर एक बड़ा और अहम आदेश जारी किया है। पिछली ममता सरकार ने इस साल बकरीद पर 26 और 27 मई को दो दिन की छुट्टी घोषित की थी, लेकिन अब शुभेंदु सरकार ने इस फैसले में बड़ा बदलाव करते हुए इसे सिर्फ एक दिन तक सीमित कर दिया है।
अब 28 मई को रहेगा सार्वजनिक अवकाश
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी नए आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक, राज्य में अब बकरीद के अवसर पर केवल 28 मई को ही सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि पूर्व में घोषित 26 और 27 मई की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। इन दोनों दिनों में बंगाल के सभी सरकारी कार्यालय, संस्थान और अन्य जगहों पर नियमित रूप से काम-काज सुचारू रहेगा। छुट्टी में यह बदलाव राज्य सरकार के उस अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह पिछली सरकार के कई पुराने फैसलों पर कैंची चला रही है। इसी क्रम में आज साल्ट लेक स्टेडियम में ममता सरकार के कार्यकाल के दौरान बनाए गए एक स्टैच्यू को भी गिरा दिया गया, जिसकी पुष्टि खुद राज्य के खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने की है।
पुरानी भर्ती घोटालों पर बरसे सीएम शुभेंदु
छुट्टियों में बदलाव के साथ-साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पिछली तृणमूल कांग्रेस (ञ्जरूष्ट) सरकार के कार्यकाल में हुए भर्ती घोटालों को लेकर भी तीखा हमला बोला है। शनिवार को एक बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि इन घोटालों की वजह से पूरे देश में पश्चिम बंगाल की भारी बदनामी हुई है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछली सरकार में हुई अनियमितताओं के कारण कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा था, जिसके चलते 26,000 से ज्यादा स्कूली नौकरियां रद्द करनी पड़ी थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्थिति से राज्य की साख को गहरा आघात पहुंचा है और अब बंगाल को इस दलदल से बाहर निकालने का समय आ गया है।
विधानसभा के अगले बजट सत्र में आएगी नई पारदर्शी भर्ती नीति
भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के आगामी बजट सत्र में एक बिल्कुल नई और पारदर्शी भर्ती नीति का विधेयक पेश किया जाएगा। इस नई नीति की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि भर्ती परीक्षाओं के तुरंत बाद उम्मीदवारों को उनकी ‘ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशनÓ (ह्ररूक्र) उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने पिछली प्रणाली की आलोचना करते हुए कहा, “मुझे पता चला है कि पहले ओएमआर शीट की प्रति परीक्षार्थियों को नहीं दी जाती थी, जो कि बेहद दुर्भावनापूर्ण कदम था। यह सब सिर्फ भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए किया जाता था।” उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकार की भर्ती प्रणाली में साक्षात्कार (ढ्ढठ्ठह्लद्गह्म्1द्बद्ग2) को सबसे अधिक अंक दिए जाते थे, जो कि उचित नहीं है। नई नीति में साक्षात्कार के अंक न्यूनतम रखे जाएंगे।
‘परीक्षा केंद्र बदनाम हुए, आरक्षण के नियमों की हुई अनदेखीÓ
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने पिछली सरकार पर संवैधानिक नियमों की अनदेखी करने का भी गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने भर्तियों में ओबीसी, एससी/एसटी, दिव्यांग और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण के ‘100 बिंदु रोस्टरÓ का सही तरीके से पालन नहीं किया था।
मुख्यमंत्री ने राज्य के परीक्षा केंद्रों की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि हालात इतने खराब हो गए थे कि पूर्व रेलवे, दक्षिण-पूर्व रेलवे और पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने राज्य में अपनी भर्ती परीक्षाएं आयोजित करना ही बंद कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप आज पश्चिम बंगाल के युवाओं को परीक्षा देने के लिए मजबूरन बिहार, असम और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों का रुख करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने दृढ़ता के साथ कहा कि उनकी सरकार जल्द ही इस पूरी व्यवस्था को सुधार कर राज्य के युवाओं को न्याय दिलाएगी।