चकबंदी जागर यात्रा में गूंजी पहाड़ बचाने की आवाज

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चौबट्टाखाल में ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने भरी हुंकार
जयन्त प्रतिनिधि।
सतपुली : “गाँव खुशहाल तो राज्य खुशहाल” के मूल मंत्र के साथ ‘गरीब क्रांति अभियान, उत्तराखंड’ एवं ‘भलु लगद / फील गुड संस्था’ के संयुक्त तत्वावधान में चौबट्टाखाल में विशाल “चकबंदी जागर यात्रा” का सफल आयोजन किया गया। इस यात्रा में 100 से अधिक काश्तकारों, जनप्रतिनिधियों एवं चकबंदी कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।


यह यात्रा मुख्य बाजार चौबट्टाखाल से जुलूस के रूप में निकलकर तहसील मुख्यालय परिसर तक पहुंची। मुख्य बाजार में स्थानीय काश्तकारों, जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों के साथ एक सूक्ष्म जनसंवाद आयोजित किया गया। इस मौके पर बलबंत गुसाईं (समंवयक, गरीब क्रांति अभियान) ने सरकार की कार्यशैली पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि एक ओर सरकार चकबंदी को पहाड़ी खेती व बागवानी के लिए संजीवनी बता रही है, तो दूसरी तरफ चकबंदी की दिशा में एक नया कदम बढ़ाने से कतरा रही है। सरकार समय रहते चेत जाए, वरना गांवों का अस्तित्व बचाने के लिए ग्रामीण काश्तकार बहुत जल्द अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर होगा। सुधीर सुन्द्रियाल (संस्थापक, फील गुड संस्था) ने वन्यजीवों के बढ़ते आतंक पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वन्यजीवों से लगातार ग्रामीण जनता परेशान है। गांवों के अस्तित्व को बचाने और खेती को सुरक्षित करने के लिए सरकार को चकबंदी जैसी योजनाएं तुरंत लागू करनी चाहिए। समाजसेवी सुरेंद्र सिंह रावत ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा सरकार कभी ‘आंशिक’ तो कभी ‘स्वैच्छिक’ जैसे नए-नए नाम देकर केवल चकबंदी का नामकरण ही कर रही है। सरकार को चाहिए कि जो पहले से नोटिफाइड गांव हैं, उनकी तुरंत चकबंदी कर एक सफल मॉडल तैयार किया जाए।

एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा 8 सूत्रीय मांगपत्र
इस मौके पर उप जिलाधिकारी चौबट्टाखाल के माध्यम से मुख्यमंत्री, उत्तराखंड सरकार को 8 सूत्रीय मांगपत्र प्रेषित किया गया। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने ग्राम सभा स्तर पर किसानों के बीच संवाद आयोजित कर चकबंदी से जुड़ी तमाम भ्रांतियों को दूर किया जाए, पर्वतीय चकबंदी हेतु अलग ‘हिल कैडर’ का गठन हो तथा पूर्व में बंद किए गए पर्वतीय ग्रामों में चकबंदी विभाग को पुनर्जीवित किया जाए, पूर्व में चयनित सात नोटिफाइड गांवों (तंगोली, पंचूर, खैरासैंण, लखोली, ढांगल, औणी व ग्वीन मल्ला) में तुरंत व्यावहारिक चकबंदी प्रक्रिया शुरू की जाए, स्वैच्छिक चकबंदी के विफल प्रयासों के बाद अब सरकार धरातल पर अनिवार्य चकबंदी हेतु योजना बनाएं, नाप कृषि भूमि पर उगे वृक्षों पर काश्तकार का पूर्ण अधिकार तय हो और बिना जटिल विभागीय अनुमति के दोहन की छूट मिले, वन्यजीवों द्वारा फसल नुकसान का मुआवजा पारदर्शी स्थलीय निरीक्षण से तय हो और नियमों में संशोधन कर भूमि स्वामी के स्थान पर वास्तविक फसल बोने वाले काश्तकार को मुआवजा दिया जाए, किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने हेतु प्रत्येक विकासखंड स्तर पर कृषि विपणन केंद्रों की स्थापना की जाए, जंगली जानवरों के आतंक से फसलों की सुरक्षा हेतु प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर तारबाड़ के लिए विशेष बजट का स्थायी प्रावधान करने की मांग की है।

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