श्रीनगर गढ़वाल : बछेली के तरुली गांव में गुलदार के हमले में महिला की मौत के बाद से क्षेत्र में गुलदार की दहशत बरकरार है। डर के कारण सोमवार को तरुली, बछेली और लगानु गांव के छात्र-छात्राएं स्कूल नहीं गए। इन गांवों के करीब 18 से 20 छात्र साढ़े तीन किलोमीटर दूर राजकीय इंटर कॉलेज और प्राथमिक विद्यालय खंडाह में पढ़ते हैं। अभिभावकों ने गुलदार के पकड़े जाने या मारे जाने तक बच्चों के लिए स्कूल आने-जाने के लिए वाहन उपलब्ध कराने की मांग की।

तरुली निवासी मनोज कुमार और विशंभर सिंह ने बताया कि उनके बच्चे प्राथमिक विद्यालय और राइंका खंडाह में पढ़ते हैं, लेकिन गुलदार के डर के कारण सोमवार को उन्हें स्कूल नहीं भेजा। बछेली के रवि कुमार ने भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्कूल की ओर से भी बच्चों को नहीं भेजने और ऑनलाइन पढ़ाई से संबंधित कार्य उपलब्ध कराने की सूचना दी गई है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में झाड़ियों का कटान नहीं होने और पर्याप्त स्ट्रीट लाइटें नहीं लगाए जाने पर भी नाराजगी जताई। ग्राम प्रधान कुलदीप गुसाईं ने कहा कि बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए वाहन की व्यवस्था की जानी चाहिए। अश्वनी रावत, खंड शिक्षा अधिकारी, खिर्सू ने बताया कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है। शिक्षकों और अभिभावकों को सभी सुरक्षात्मक उपाय करने को कहा गया है। गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में जो बच्चे भय के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे उनके लिए ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। डीएफओ पौड़ी महातिम यादव ने बताया कि ग्रामीणों और वन विभाग की संयुक्त टीम तैयार कर छात्रों को स्कूल छोड़ने की व्यवस्था की जा रही है। इस संबंध में मुख्य शिक्षा अधिकारी से भी वार्ता की गई है। प्रयास है कि मंगलवार से बच्चों के स्कूल जाने और घर लौटने तक की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाए। बछेली तरुली में महिला को मारने वाला गुलदार न ट्रैप कैमरों और न ही पिंजरे में कैद हुआ। डीएफओ ने बताया कि विभाग की टीमें निरंतर गश्त पर हैं। गुलदार को पकड़ने और उसकी पहचान के लिए प्रयास जारी हैं। (एजेंसी)