कोटद्वार में डाक्टरों के अवैध क्लीनिकों पर छापेमारी, चार सील

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार।
लकड़ी पड़ाव क्षेत्र में लंबे समय से संचालित हो रहे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे अवैध निजी क्लीनिकों पर मंगलवार को स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर चार क्लीनिकों को सीज कर दिया। छापेमारी की भनक लगते ही दो क्लीनिक संचालक फरार हो गये। अचानक हुई छापेमारी से अवैध रूप से क्लीनिक संचालित कर रहे डॉक्टरों में हड़कंप मच गया। कुछ डॉक्टर अपने क्लीनिक को बंद कर भाग गये। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम का विरोध किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह बड़े अस्पतालों में महंगा इलाज नहीं करा सकते है, इसलिए इन्हीं डॉक्टरों से अपना इलाज कराते है।

कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग अचानक नींद से जाग गया। स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासन की टीम के साथ लकड़ीपड़ाव स्थित निजी क्लीनिकों में छापेमारी की। इसी दौरान एक क्लीनिक को सील करते समय वहांड हंगामा हो गया। स्थानीय लोगों ने तहसीलदार कोटद्वार और स्वास्थ्य विभाग की गाड़ी रोककर काफी देर तक हंगामा काटा। हंगामा इतना बढ़ गया कि प्रशासन को पुलिस को बुलाना पड़ा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह मामला शांत कराया। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोरोना काल में इन्हीं डॉक्टरों ने उनका इलाज किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की टीम ने कहीं और से दवाई लेकर निजी क्लीनिक में रखी है। गिने चुने क्लीनिकों में ही छापेमारी की गई है। प्रशासन अगर छापेमारी करनी थी तो सभी क्लीनिकों में करनी चाहिए। वहीं निजी क्लीनिक के डॉक्टर उमर दराज का आरोप है कि छापेमारी के दौरान टीम ने उनके दस्तावेज देखने से इंकार कर दिया। जबकि उनके दस्तावेज डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रमाणित है। इसके माध्यम से हम प्रैक्टिस कर सकते है। प्राथमिक रूप से उपचार कर सकते है। उन्होंने कहा कि उनके दस्तावेजों को वैध मानकर उन्हें क्लीनिक खोलने की अनुमति दी जाय।


उपजिलाधिकारी योगेश मेहरा ने बताया कि कुछ दिनों से शिकायत प्राप्त हो रही थी कि लकड़ीपड़ाव में अवैध तरीके से निजी क्लीनिक संचालित किये जा रहे है। इसी के क्रम में मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के साथ संयुक्त छापेमारी की गई। इस दौरान चार क्लिीनिक ऐसे पाये गये है जो क्लीनिकल स्टेबलिस मैनेजमेंट एक्ट के तहत रजिस्ट्र्रड नहीं है। फिलहाल चारों क्लीनिक को सील कर दिया गया है। दो क्लीनिक के संचालक ऐसे थे जो टीम को देखकर मौके से गायब हो गये। उनके खिलाफ भी कार्यवाही की जा रही है। एसडीएम ने बताया कि औचक निरीक्षण के बाद कुछ निजी क्लीनिक संचालक थोड़े समय के लिए गायब हो जाते है उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही किया जाना जरूरी है। उपजिलाधिकारी योगेश मेहरा ने बताया कि क्लीनिक संचालन कर्ताओं द्वारा क्लीनिकल स्टेबलिस मैनेजमेंट एक्ट के अन्तर्गत पंजीकरण न कराकर अवैध रूप से क्लीनिक संचालित किया जा रहा है एवं बायो मेडिकल वेस्ट को बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एवं हैंडलिंग रूल के अनुसार निस्तारित न करते हुए यत्र-तत्र फेंका जा रहा है, जो कि कोविड-19 एवं आम जनमानस के स्वास्थ्य की दृष्टि से भी हानिकारक है।

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