चीनी ऐप्स पर देश के प्रमुख लोगों के फोन सर्विलांस पर रखने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली, एजेंसी। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान व पूर्व न्यायाधीशों और अन्य प्रमुख लोगों के फोन सर्विलांस (निगरानी) के चीन पर आरोप की जांच के लिए दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। शीर्ष न्यायालय अगले साल जनवरी में इस याचिका पर सुनवाई शुरू करेगा। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह याचिका स्वीकार की। यह जनहित याचिका गैर सरकार संगठन सेव देम इंडिया ने दायर की है। याचिका में साइबर टेररिज्म और साइबर क्राइम की धाराओं के तहत एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू करने के लिए आदेश देने की मांग की गई है।
याचिका में चीन द्वारा संचालित डिजिटल मनी लेंडिंग एप्स पर रोक लगाने का आदेश देने की मांग की गई है। साथ ही गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और डिजिटल मनी लेंडिंग एप्स के पारदर्शी कामकाज के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है। याचिका में अनलाइन व्यक्तिगत जानकारियों की सुरक्षा के लिए तैयार विधेयक द प्रोटेक्शन अफ पर्सनल डाटा 2019 पर केंद्र सरकार की उदासीनता पर भी सवाल उठाया गया है। इस पर भी शीर्ष न्यायालय से निर्देश की अपेक्षा की गई है। याचिका में चीन के एप्स के जरिये डाटा की चोरी रोकने के लिए कड़े कदम उठाने के वास्ते दिशानिर्देशों की भी मांग की गई है।
देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए इसे जरूरी बताया गया है। याचिका में देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, न्यायाधीशों और अन्य हजारों प्रमुख लोगों से जुड़ी सूचनाओं को गोपनीय रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने का अनुरोध किया गया है। कहा गया है कि चीन का खुफिया तंत्र राष्ट्रहित से जुड़ी सभी तरह की सूचनाओं की चोरी में लगा हुआ है। इसलिए जरूरी हो गया है कि कड़े कदम उठाकर उन्हें रोका जाए।

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