0-अब उत्तर-पूर्वी मानसून पर नजर, दक्षिण भारत में बारिश का दौर जारी रहने के आसार
नई दिल्ली , दक्षिण-पश्चिम मानसून का चार महीने का मौसम 30 सितंबर को समाप्त हो गया। जून से सितंबर के दौरान देश में सामान्य से करीब 13 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में देश में करीब 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश लगभग 868.6 मिलीमीटर रहती है।
मानसून के दौरान बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा। जून में बारिश सामान्य से करीब 65 फीसदी कम रही, जबकि जुलाई में इसमें उल्लेखनीय सुधार हुआ और बारिश सामान्य के करीब पहुंच गई। अगस्त में फिर कमी दर्ज की गई, जबकि सितंबर में बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने मौसमी तंत्रों के कारण बारिश में कुछ सुधार हुआ।
क्षेत्रवार स्थिति देखें तो दक्षिण भारत में सामान्य से करीब 24 फीसदी और पूर्वोत्तर क्षेत्र में करीब 26 फीसदी कम बारिश हुई। बिहार, पश्चिमी राजस्थान तथा सौराष्ट्र-कच्छ भी कम बारिश वाले प्रमुख क्षेत्रों में रहे। इसके विपरीत मध्य भारत में बारिश सामान्य की करीब 97 फीसदी रही, जबकि पूर्वोत्तर भारत में यह करीब 94 फीसदी दर्ज की गई। दिल्ली में मानसून की अवधि अपेक्षाकृत कम रहने के बावजूद सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना अल नीनो पूरे मानसून मौसम के दौरान प्रभावी रही। सामान्य तौर पर अल नीनो को भारतीय मानसून के कमजोर होने से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इस बार इसका प्रभाव पिछले कुछ प्रमुख अल नीनो वर्षों की तुलना में अलग रहा और बारिश में अत्यधिक कमी नहीं हुई।
अल नीनो के आगे भी सक्रिय रहने की संभावना है, जिसका असर सर्दी और वसंत के मौसम पर पड़ सकता है। वहीं, जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश के स्वरूप में लगातार बदलाव हो रहा है। इससे मानसून के आगमन, वापसी, अवधि और बारिश के वितरण का पूर्वानुमान अधिक चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
मानसून की कमी का खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, विभिन्न क्षेत्रों में फसलों को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन अभी किया जा रहा है। कम बारिश वाले दक्षिण और पूर्वी हिस्सों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का दौर समाप्त होने के साथ उत्तर और मध्य भारत के ज्यादातर हिस्सों में मौसम शुष्क होने लगा है। शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाओं के प्रभाव से बारिश की गतिविधियां कम हो गई हैं। आसमान साफ होने और तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की संभावना है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी कम होने की उम्मीद है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के शेष हिस्सों, गुजरात तथा मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों के साथ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से मानसून की वापसी हो चुकी है। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्से भी मानसून वापसी की प्रक्रिया में शामिल रहे।
मानसून की विदाई के बावजूद देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी। उत्तरी म्यांमार और उससे सटे दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश, मिजोरम तथा उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण और द्रोणिका रेखाएं सक्रिय हैं।
बिहार में 3 से 6 अक्टूबर तक बारिश होने की संभावना है। 4 से 6 अक्टूबर के दौरान कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर हवा की गति 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।