हल्द्वानी। वीबी-जी रामजी योजना में ऑनलाइन हाजिरी ग्रामीणों के लिए रोजगार की राह में रोड़ा बन गई है। फेस कैप्चरिंग और रेटिना मैचिंग में आ रही तकनीकी दिक्कतों के चलते श्रमिकों की डिजिटल हाजिरी दर्ज नहीं हो पा रही है। नतीजा यह कि योजना शुरू होने के तीन महीने बाद भी जिले में पांच फीसदी ही जॉब कार्डधारक योजना का लाभ ले पाए हैं। एक जुलाई से मनरेगा का नाम बदलकर वीबी-जी रामजी योजना कर दिया है। इसमें एक परिवार को 125 दिन के लिए काम दिया जाना है लेकिन योजना के शुरुआत से ऑनलाइन हाजिरी जी का जंजाल बन गई है। श्रमिकों के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) ऐप के जरिए ऑनलाइन हाजिरी लगाना अनिवार्य है लेकिन तकनीकी कारणों से इसमें दिक्कतें आ रही हैं। आंकड़ों के अनुसार जिले के आठ विकासखंडों में 41022 जॉब कार्डों में 65885 श्रमिक पंजीकृत हैं लेकिन अब तक मात्र 3146 श्रमिक ही रोजगार पा सके हैं।
गांव में होते हैं ये काम
वीबी-जी रामजी योजना से गांवों में सीसी सड़क, गौशाला, आंगनबाड़ी केंद्र, दीवार और गूल निर्माण, सोख्ता पिट बनाने जैसे कार्य किए जाएंगे।
पसीना बहाने के बावजूद दिहाड़ी की गारंटी नहीं
नियमों के अनुसार, कार्यस्थल पर मजदूरों की हाजिरी एनएमएमएस एप के जरिये सुबह और शाम ली जा रही है, इसमें हर मजदूर का चेहरा या रेटिना स्कैन कर डिजिटल उपस्थिति लगाई जाती है। मजदूर तय समय पर कार्यस्थल पहुंचते हैं लेकिन ऐप के काम न करने के कारण हाजिरी नहीं लग पाती और मजदूर काम किए बगैर लौट जाते हैं। कुछ मामलों में पसीना बहाने के बावजूद मजदूरी मिलने की कोई गारंटी नहीं रहती।