किशाऊ बांध के विरोध में ग्रामीणों के बीच पहुंचे विधायक प्रीतम सिंह

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चकराता/ देहरादून। किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। बुधवार को विधानसभा चकराता के अंतर्गत ग्राम क्वानु (कवाणु) में परियोजना का विरोध कर रहे ग्रामीणों के बीच स्थानीय विधायक एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं और उनकी चिंताएं सुनीं तथा उनकी मांगों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। गौरतलब है कि 15 सितंबर 2026 को उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में किशाऊ परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। केंद्र सरकार के अनुसार परियोजना टौंस नदी पर प्रस्तावित है और इससे सिंचाई, जलापूर्ति तथा जलविद्युत उत्पादन से जुड़े लाभ मिलने की उम्मीद है।
समझौते के बाद परियोजना से प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों की ओर से विरोध की आवाज भी सामने आई है। ग्राम क्वानु में ग्रामीणों ने अपनी कृषि भूमि, आजीविका और भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से उनकी उपजाऊ जमीन प्रभावित होने की स्थिति में उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
‘सरकार को ग्रामीणों की भावनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए’
ग्रामीणों के बीच पहुंचे विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर करते समय सरकार को स्थानीय ग्रामवासियों के विरोध और उनकी भावनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बांध निर्माण स्थल में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए थे, ताकि ग्राम क्वानु की बेहद उपजाऊ कृषि भूमि को बचाया जा सके। प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने ग्रामीणों के विरोध और उनकी चिंताओं को दरकिनार किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका, अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि इस विषय को आगामी विधानसभा सत्र में भी पुरजोर ढंग से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामवासियों की इस लड़ाई में वह उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।
परियोजना का व्यापक प्रभाव
सरकारी जानकारी के अनुसार किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रस्तावित परियोजना में टौंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध का निर्माण प्रस्तावित है। परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 1,476 मिलियन यूनिट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य बताया गया है।
वहीं, परियोजना से जुड़े पुनर्वास और प्रभावित परिवारों के मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। मीडिया रिपोर्टों में परियोजना के कारण भूमि डूब क्षेत्र और प्रभावित आबादी को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।
ऐसे में स्थानीय ग्रामीणों की मांग है कि परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं, भूमि और आजीविका से जुड़े सवालों पर गंभीरता से विचार किया जाए।
किशाऊ परियोजना को लेकर अब सरकार के सामने एक ओर छह राज्यों के बीच हुए समझौते को आगे बढ़ाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों की आपत्तियों और उनके पुनर्वास, भूमि एवं आजीविका से जुड़े सवालों का समाधान करना भी महत्वपूर्ण होगा।

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