प्राकृतिक आपदाओं के वैज्ञानिक और नीतिगत पहलू पर की चर्चा

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आपदाओं से सीख ले कर बनानी चाहिए भविष्य की योजनाएं: प्रो. सेमवाल
जयन्त प्रतिनिधि।
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विवि के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से उत्तराखण्ड में प्राकृतिक आपदाओं के वैज्ञानिक और नीतिगत पहलू पर परिचर्चा आयोजित की गई। परिचर्चा के माध्यम से उत्तराखंड में हो रहे पर्यावरणीय बदलावों से होने वाली आपदाओं का अध्ययन किया गया। इस मौके पर राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एमएम सेमवाल ने कहा की उत्तराखंड में हो रही आपदाएं न केवल प्राकृतिक बल्कि मानव जनित भी हैं। इन आपदाओं से सीख ले कर हमें भविष्य की योजनाएं बनानी चाहिए।
औद्यानिकी एवं वानिकी विवि भरसार के भूवैज्ञानिक डॉ. एसपी सती ने कहा कि हिमालय विश्व की जितनी प्राचीन और संवेदनशील पर्वत शृंखला है इसके विषय में उतनी ही कम जानकारी तथा प्राथमिक आंकड़े उपलब्ध हैं। यही कारण है कि हिमालय को लेकर उस तरह की व्यवस्थाओं का समायोजन नहीं हो पाया है । वर्ष 2017 में यूएनओ की संस्था आईपीसीसी की रिपोर्ट में भी यह बात स्पष्ट रूप से वर्णित है। प्रति दशक जिस तरह से 0.5 डिग्री सेल्सियस वैश्विक तापमान में वृद्धि हो रही है। उससे सबसे अधिक उच्च हिमालयी क्षेत्रों में नुकसान हो रहा है। रामनाथ गोयंका अवार्ड से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार सुशील बहुगुणा ने कहा कि इस बाजारवादी धारणा से निश्चित रूप से प्राकृतिक संसाधनों के समक्ष संकट उत्पन्न पैदा हो गया है। कहा विकास की इस अंधी दौड़ में ऊर्जा की लगातार बढ़ती मांग के कारण न सिर्फ हमें नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों की तरफ बढ़ना चाहिए बल्कि हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बड़े निर्माण कार्यों तथा परियोजनाओं पर भी तत्काल विराम लगाना चाहिए। संचालन शोध छात्रा शिवानी पांडे, स्वागत डॉ. नरेश कुमार व डॉ. राकेश नेगी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर डीन प्रो. आरएन गैरोला, प्रो.हिमांशु बोड़ाई, प्रो. महावीर नेगी, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. राजेश पालीवाल आदि मौजूद रहे।

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