कोलकाता , पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और उनसे जुड़े कई लोगों के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। यह कार्रवाई दुर्गा पूजा आयोजन से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले और धनशोधन के मामले में की गई। अधिकारियों के अनुसार, ईडी ने धनशोधन रोकथाम कानून के तहत चल रही जांच के सिलसिले में कुल 15 परिसरों की तलाशी ली।
जांच का केंद्र महानिर्बन रोड मास आर्ट सोसाइटी, जिसे संक्षेप में ‘मास आर्टÓ कहा जाता है, है। इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी मधुछंदा सेन इस संगठन से जुड़े हुए हैं। संगठन की स्थापना वर्ष 2022 में हुई थी और यह दुर्गा पूजा से पहले विशेष पूर्वावलोकन कार्यक्रम आयोजित करता था। इन कार्यक्रमों के माध्यम से देश-विदेश से आने वाले लोगों को कोलकाता के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों का दौरा कराया जाता था।
अधिकारियों के मुताबिक, आरोप है कि ‘मास आर्टÓ ने अपने पूर्वावलोकन कार्यक्रम के प्रचार में यूनेस्को के नाम और प्रतीक चिह्न का इस्तेमाल किया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संगठन ने स्वयं को यूनेस्को से जुड़ा या अधिकृत संगठन बताकर लोगों से बड़ी रकम एकत्र की। यह भी आरोप है कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ऊंची कीमतों पर टिकट और विशेष प्रवेश-पत्र बेचे गए।
बताया गया है कि इस पूर्वावलोकन कार्यक्रम में कोलकाता के 24 दुर्गा पूजा पंडालों को शामिल किया गया था। आम लोगों के लिए पूजा शुरू होने से पहले इन पंडालों में विशेष प्रवेश की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए अलग-अलग श्रेणी के प्रवेश-पत्र और टिकट जारी किए गए थे, जिनकी कीमत कई हजार रुपये तक बताई गई है।
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, ईडी इस बात की पड़ताल कर रहा है कि ‘मास आर्टÓ के नाम पर विभिन्न स्रोतों से कितनी धनराशि एकत्र की गई और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। जांच में कथित तौर पर 50 करोड़ से 60 करोड़ रुपये के बीच के वित्तीय लेनदेन की जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है।
जांच एजेंसी संगठन के बैंक खातों और उनसे जुड़े लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है। इसके अलावा धन प्राप्त करने वाले लोगों और संस्थाओं की पहचान की जा रही है। ईडी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि एकत्र की गई रकम का वास्तविक इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से किया गया।
मामले को लेकर इस वर्ष जून में कोलकाता पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ‘मास आर्टÓ ने यूनेस्को से जुड़ी संस्था होने का कथित तौर पर गलत दावा करते हुए प्रतिभागियों से भारी रकम एकत्र की। इसके बाद मामला जांच एजेंसियों के संज्ञान में आया।