किसान महाकुंभ में किसानों ने समस्याओं को रखा

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हरिद्वार। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के किसान महाकुंभ के तीसरे दिन बुधवार को आयोजित पंचायत में किसानों की समस्याएं प्रमुखता से उठाई गईं। राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि ट्रेड डील में किसानों की अनदेखी हुई तो देशभर में आंदोलन किया जाएगा। बुधवार को आयोजित किसान पंचायत में राष्ट्रीय पदाधिकारियों, प्रदेश, जिले, ब्लॉक पदाधिकारियों सहित लाखों की संख्या में किसान उपस्थित रहे।
गुरुवार को आखरी दिन सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि 22 तारीख को अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल ट्रेड डील की वार्ता के लिए भारत आ रहा है। वार्ता में देश के किसानों के मुद्दे पर बात नहीं होती है तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उससे पहले सरकार को पत्र के माध्यम से किसानों की समस्याओं को सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। सरकार किसानों की समस्याओं को दूर करे। अमेरिका भारत के किसानों का भविष्य तय नहीं कर सकता है।
खानपुर विधायक उमेश कुमार ने कहा कि महेंद्र सिंह टिकैत ने आंदोलन खड़ा किया जिसके आगे सरकार झुकीं। महाराष्ट्र महासचिव रूपाली पाटिल ने कहा कि संगठन को मजबूत करना है। सरकार के खिलाफ आवाज को बुलंद करना है। हरिद्वार जिला आपदा से पीड़ित होता है। किसान मुआवजे के लिए धक्के खाता है। किसान क्रेडिट कार्ड पर एक प्रतिशत ब्याज देता है। बिजली का बिल माफ नहीं होता। सरकारें आंदोलन से ही सुनती हैं। जब जब आंदोलन हुआ किसानों को उनका अधिकार मिला। स्मार्ट मीटर का मुद्दा बहुत बड़ा है। इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाए। इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव ओमपाल सिंह मलिक, उपाध्यक्ष कुशलपाल आर्य, बलराम नंबरदार, राष्ट्रीय महासचिव राजबीर सिंह जादोन, जम्मू कश्मीर प्रदेश अध्यक्ष विनोद कोतवाल, कविता चौधरी, बबली सिंह, गढ़वाल अध्यक्ष संजय चौधरी, सूबा सिंह ढिल्लों, प्रेम सिंह आदि हजारों किसान उपस्थित रहे।
युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव टिकैत के पहुंचने पर किसानों में अलग ही जोश था। गौरव टिकैत ने कहा कि भाजपा सरकार में किसान और मजदूरों का विकास नहीं हो रहा है। हर मुद्दे पर सरकार नाकाम साबित हो रही है। किसानों के सामने स्मार्ट मीटर, खाद, बिजली आदि की समस्याएं है। स्मार्ट मीटर लगाकर किसानों मजदूरों को डराया जा रहा है। सरकार का जो विरोध करता है उस पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। यूरिया, खाद मिल नहीं रहा जिसके कारण किसानों के सामने खेती करने का भी संकट आ रहा है। किसानों को फसलों का दाम पूरा नहीं मिलता जबकि किसान को देश में अन्नदाता का दर्जा दिया जाता है। आलू, सेब और अन्य फसलों को उगाने में होने वाले खर्च का दाम भी नहीं मिल पाता। सरकार ने किसानों की तरफ से पूरी तरह आँखे मूंदी हुई हैं।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) शिक्षक प्रकोष्ठ ने राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के सामने अपनी समस्याएं उठाई। सोबिंदर बालियान, सरिता रानी, ओमपाल सिंह, रामरतन बालियान, हिमांशु राठी आदि ने बताया कि शिक्षकों से अतिरिक्त शैक्षणिक कार्य करवायें जा रहें हैं। शिक्षक का कार्य बच्चों को शिक्षा देना है लेकिन सरकार अन्य कार्य भी करवा रही है जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ता है। कई ऐसी अतिरिक्त ड्यूटी लगाई जाती हैं जिसमें शिक्षकों का कोई कार्य नहीं होता। इसे बंद होना चाहिए जिससे शिक्षक सिर्फ बच्चों को पढ़ाने का कार्य करे।

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