रुद्रप्रयाग। हरियाली देवी की ऐतिहासिक पदयात्रा शनिवार को हरियाली कांठा से जसोली लौट आई। शुक्रवार शाम जसोली से करीब सात किलोमीटर की पदयात्रा कर डोली हरियाली कांठा पहुंची थी। शनिवार सुबह सूर्य की पहली किरण के साथ डोली ने मंदिर परिसर में प्रवेश किया। इस दौरान देवी के पश्वा अवतरित हुए और बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों को आशीर्वाद दिया।
मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना, हवन-यज्ञ और आरती की गई। चारों दिशाओं की पूजा के बाद देवी की डोली ने जसोली के लिए प्रस्थान किया। दोपहर में डोली भक्तों के साथ जसोली पहुंची। यहां महिलाओं, धियाणियों और क्षेत्रीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर डोली का स्वागत किया। मंदिर पहुंचने पर पश्वाओं पर हरियाली देवी सहित अन्य देवी-देवता अवतरित हुए और भक्तों को आशीर्वाद दिया। मान्यता है कि जसोली हरियाली देवी का ससुराल और हरियाली कांठा उनका मायका व मूल मंदिर है। इसी मान्यता के चलते इस पदयात्रा को लेकर जिले के साथ ही अन्य जनपदों के श्रद्धालुओं में भी उत्साह रहता है। मंदिर के पुजारी विनोद प्रसाद मैठाणी ने बताया कि हरियाली कांठा में पूजा-अर्चना के बाद देवी की डोली वापस जसोली पहुंच गई है। इस ऐतिहासिक और पौराणिक यात्रा का विधिवत संपन्न कराया गया। इस मौके पर मुख्य पुजारी विनोद मैठाणी, पर्यावरणविद जगत सिंह चौधरी, विजय प्रसाद जसोला, चंद्रप्रकाश जसोला, कोदिमा के प्रधान हनुमंत बिष्ट और बल्लभ प्रसाद जसोला, रोहित बिष्ट सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।