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वादा था जापान में मिलेंगी 50,000 नौकरियां, अब तक मिली सिर्फ 120, मोदी-किशिदा वार्ता में उठेगा मुद्दा

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नई दिल्ली, एजेंसी। वर्ष 2017 में भारत और जापान के बीच टेक्निकल इंटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम समझौता हुआ था जिसे दोनों देशों की सरकारों की तरफ से ऐतिहासिक बताया गया था।
दोनों देशों की सरकारों की तरफ से दावा था कि यह जापान में श्रमिकों की किल्लत और भारत में रोजगार योग्य प्रशिक्षित युवाओं के बीच सामंजस्य का बेहतरीन अंतरराष्ट्रीय नमूना है। पांच वर्ष बीत जाने के बाद इस प्रोग्राम की प्रगति बहुत ही धीमी है।
जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और पीएम नरेन्द्र मोदी के बीच सोमवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक में यह मुद्दा उठेगा और बहुत संभव है कि इस समझौते पर अमल की रफ्तार को तेज किया जाए। सूत्रों ने बताया है कि कोविड भी एक कारण रहा है कि जिसकी वजह से टीआईटीपी को लेकर वैसी प्रगति नहीं हो सकी जैसी कि उम्मीद थी।
जब समझौता किया गया था कि तब भारत सरकार के तत्कालीन कौशल विकास मंत्री ने कहा था कि पांच वर्षों में तीन लाख भारतीय युवाओं को जापान की जरूरत के हिसाब से प्रशिक्षित किया जाएगा और उनमें से 50 हजार को वहां स्थाई तौर पर नौकरी भी मिलेगी, लेकिन अब विदेश मंत्रालय के पास जो डाटा है उसके हिसाब से सिर्फ 606 युवाओं को प्रशिक्षण मिल पाया है और इसमें से 120 को नौकरी, जबकि जापान में इस तरह के प्रशिक्षित युवाओं की मांग कोविड की वजह से बढ़ गई है।
एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि जापानी भाषा सीखने की जरूरत की वजह से बहुत सारे युवा इसकी योग्यता को पूरा नहीं कर पा रहे। वैसे दोनों देशों के संबंधित विभागों के बीच इन बाधाओं को दूर करने के लिए कुछ नये कार्यक्रम बनाए गए हैं। मोदी और किशिदा के बीच होने वाली वार्ता में यह मुद्दा उठाया जाएगा।
किशिदा सोमवार सुबह नई दिल्ली पहुंचेंगे और तकरीबन 26 घंटे वो यहां प्रवास करेंगे। इस दौरान वो पीएम मोदी के साथ व्यक्तिगत और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी करेंगे। यह इस वर्ष दोनों नेताओं के बीच पहली व्यक्तिगत मुलाकात होगी, लेकिन आने वाले महीनों में इनके बीच कई बार वार्ता होने की संभावना है।
मई, 2023 में पीएम मोदी के भी जापान जाने की संभावना है जहां वह जी-7 देशों की बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके तुरंत बाद ऑस्ट्रेलिया में क्वाड देशों (अमेरिका, जापान, भारत व ऑस्ट्रेलिया का संगठन) की भी बैठक है। उसके बाद सितंबर, 2023 में पीएम किशिदा जी-20 बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत आने वाले हैं।
मोदी और किशिदा की बैठक में पिछले वर्ष से लागू भारत जापान औद्योगिक प्रतिस्पर्धा साझेदारी (कखकउढ) की भी समीक्षा की जाएगी। इस समझौते से चीन से बोरिया बिस्तर समेट रही जापान की कंपनियों को भारत में स्थापित करने में सहूलियत दी जाने की बात है।
समझौते से जुड़े रोडमैप को लेकर फरवरी, 2023 में ही एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसकी रिपोर्ट दोनों प्रधानमंत्रियों के समक्ष रखी जाएगी। जापान भारत में निवेश करने वाला पांचवां सबसे बड़ा देश है। अभी 1450 जापानी कंपनियां यहां काम कर रही हैं। भारत की नजर जापान की लघु व मझोली औद्योगिक इकाइयों पर है और उन्हें यहां आकर्षित करने की कोशिश चल रही है। दोनों नेताओं के बीच भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग के मौजूदा स्तर और इसे ज्यादा से ज्यादा प्रगाढ़ बनाने को लेकर भी बातचीत होगी।
दोनों देशों की युद्धक विमानों के बीच पहला सैन्य अभ्यास जनवरी, 2023 में ‘वीर गार्जियन’ पूरा किया गया है। इसके बीच इनकी सेनाओं के बीच धर्म गार्डियन के नाम से अभ्यास हुआ है। भारत व जापान की नौ सेनाओं के बीच कई स्तर के अभ्यास चल रहे हैं।

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