शिमला, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष खं्र फें ळँं‘४१ ने प्रदेश सरकार पर चुनावी वादों से मुकरने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की गारंटी दी थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार ने उल्टा बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया।
शिमला में जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने चुनाव के समय घर-घर जाकर 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बनने के बाद न केवल इस वादे को भुला दिया गया, बल्कि पूर्व भाजपा सरकार की 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना को भी लगभग समाप्त कर दिया गया। इसके अलावा 300 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को मिल रही सब्सिडी भी खत्म कर दी गई, जिससे बिजली बिलों में दो से ढाई गुना तक वृद्धि हुई।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री र४‘ँ५्रल्लीि१ र्रल्लॠँ र४‘ँ४ के नेतृत्व वाली सरकार लगातार बिजली दरों में बढ़ोतरी कर रही है। अब ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार (एफपीपीसीए) के रूप में प्रति यूनिट 33 पैसे का अतिरिक्त बोझ डाला गया है, जिससे प्रत्येक उपभोक्ता पर औसतन 100 से 125 रुपये तक का अतिरिक्त भार पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी वाली बिजली पर भी यह अधिभार लगाया जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार हर वर्ग को राजस्व जुटाने का माध्यम बना रही है और चुनावी वादों के विपरीत काम कर रही है।
प्रदेश में बढ़ते अपराध और प्रशासनिक खींचतान पर चिंता जताते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। उन्होंने हाल की आपराधिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, जबकि पुलिस विभाग आंतरिक विवादों में उलझा हुआ दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के बीच विवाद चर्चा का विषय बना रहा और अब आईपीएस अधिकारियों के बीच मतभेद भी सार्वजनिक रूप से सामने आ रहे हैं। उनके अनुसार, इससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है और प्रदेश हित को नुकसान पहुंच रहा है।
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार प्रभावी नेतृत्व देने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर प्रदेश में व्यवस्था का पतन देखने को मिल रहा है और मुख्यमंत्री इन घटनाक्रमों पर मौन बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की अस्थायी व्यवस्थाओं और प्रशासनिक ढिलाई का खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।