कर्नाटक लोक सेवा परीक्षा में मनचाही नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों ने घूस दी, ईडी का खुलासा

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बेंगलुरु , कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के तहत पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित धांधली और प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती परीक्षा में मनचाही नियुक्ति दिलाने के नाम पर उम्मीदवारों से लाखों रुपये की वसूली की गई थी। इतना ही नहीं, बकाया रकम की वसूली सुनिश्चित करने के लिए कुछ उम्मीदवारों से खाली हस्ताक्षरित चेक और वचन पत्र भी लिए गए थे।
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से बुधवार को जारी जांच रिपोर्ट में बताया गया कि शुरुआत में उम्मीदवारों से नियुक्ति के लिए करीब 80 लाख रुपये की मांग की गई थी। हालांकि, बाद में बातचीत के बाद यह राशि घटाकर प्रति उम्मीदवार 30 लाख से 40 लाख रुपये के बीच तय की गई। एजेंसी के मुताबिक, इस कथित लेन-देन में कुछ रकम नकद और बैंक हस्तांतरण के माध्यम से अग्रिम रूप से वसूली गई, जबकि शेष राशि के भुगतान की गारंटी के लिए उम्मीदवारों से खाली हस्ताक्षरित चेक और वचन पत्र प्राप्त किए गए।
ईडी ने अपनी जांच में बताया कि तलाशी अभियान के दौरान इस कथित लेन-देन से जुड़े कुछ दस्तावेज बरामद किए गए हैं। एजेंसी ने इन दस्तावेजों को जब्त कर जांच में शामिल किया है। जांच अधिकारियों के अनुसार, बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं तथा धन के लेन-देन की पड़ताल की जा रही है।
यह मामला कर्नाटक लोक सेवा आयोग की ओर से पशु चिकित्सा अधिकारी के 400 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में कथित हेराफेरी से जुड़ा है। आरोप है कि परीक्षा में धांधली और प्रश्नपत्र लीक के जरिए उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई थी।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 17 सितंबर को कर्नाटक लोक सेवा आयोग की पूर्व परीक्षा नियंत्रक बिंदु बसवराज कन्नाले को गिरफ्तार किया था। इसके अगले दिन, 18 सितंबर को ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को भी धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया। दोनों इस मामले की जांच के केंद्र में हैं।
ईडी कथित भर्ती घोटाले से जुड़े धन के स्रोत, लेन-देन और उससे लाभान्वित होने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य कथित अवैध धन के प्रवाह और भर्ती प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं के बीच संबंधों का पता लगाना है। फिलहाल, मामले में जांच जारी है और सामने आए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।
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