जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : कोटद्वार क्षेत्र के लिए यह गौरव का विषय है कि चार एनएसएस स्वयं सेवकों का चयन 25 से 31 अक्टूबर 2026 तक राष्ट्रीय युवा केंद्र, गढ़पुरी, हरियाणा में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय एकीकरण शिविर के लिए हुआ है। यह शिविर युवा फोर माई भारत एवं युवा फोर डिजीटल लिटरेंसी थीम पर आयोजित किया जा रहा है। स्वयं सेवकों के चयन से विद्यालयों एवं कोटद्वार क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

राष्ट्रीय एकीकरण शिविर में प्रतिभाग करने वाले स्वयं सेवकों में कुनाल बिष्ट एवं प्रियांशी बिष्ट डैफोडिल पब्लिक स्कूल, कोटद्वार, मेहफूज एसजीआरआर, कोटद्वार एवं कुमकुम रावत सरस्वती विद्या मंदिर, जानकी नगर, कोटद्वार शामिल हैं। ये सभी स्वयंसेवक शिविर में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी एवं उत्तराखंड टीम के प्रभारी शंकर बहादुर ने बताया कि स्वयं सेवकों का चयन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार किया गया है। चयन प्रक्रिया में माई भारत पोर्टल एप पर स्वयं सेवक का पंजीकरण एक महत्वपूर्ण अनिवार्य मानदंड था। इसके अतिरिक्त स्वयं सेवकों की एनएसएस गतिविधियों में सहभागिता, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक कार्यों में योगदान तथा राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने की योग्यता को भी ध्यान में रखा गया। शंकर बहादुर ने राष्ट्रीय एकीकरण शिविर के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि शिविर का उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों के युवाओं को एक मंच पर लाकर उनमें राष्ट्रीय एकता, भाईचारा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी एवं राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करना है। शिविर में विभिन्न राज्यों से आए एनएसएस स्वयं सेवक अपनी-अपनी संस्कृति, परंपराओं एवं उपलब्धियों को साझा करते हुए एक-दूसरे को समझने का अवसर प्राप्त मिलता हैं। साथ ही विभिन्न शैक्षिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं जागरूकता संबंधी गतिविधियों के माध्यम से युवाओं के व्यक्तित्व विकास पर भी बल दिया जाता है। स्वयं सेवकों के चयन पर डॉ. सुनेना रावत राज्य एनएसएस अधिकारी, प्रमेन्द्र कुमार बिष्ट अपर निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, गढ़वाल मंडल पौड़ी, पुष्कर सिंह नेगी मंडलीय कार्यक्रम समन्वयक गढ़वाल मंडल ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर के इस शिविर में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करना स्वयं सेवकों के लिए गौरव की बात है। यह उपलब्धि अन्य युवाओं को भी एनएसएस एवं सामाजिक सेवा की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करेगी।