कोटद्वार में डेंगू नहीं है फिर भी डेंगू व मलेरिया से सतर्क रहने की जरूरत

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। जिस मौसम में डेंगू का मच्छर पनपता है, वो मौसम आने वाला है, ऐसे में प्रशासन को इसके लिए तैयार रहने और लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। नगर निगम प्रशासन डेंगू व मलेरिया को लेकर गंभीर हो गया है। निगम प्रशासन ने क्षेत्र में फोगिंग करना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग भी डेंगू को लेकर सर्तक हो गया है।
बरसात के मौसम में डेंगू और मलेरिया की बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है। क्योंकि बरसात के समय ज्यादा दिनों से पानी जमा होने से डेंगू का मच्छर पैदा हो जाता है। पिछले दो-तीनों सालों में डेंगू ने कोटद्वार में खूब दहशत फैलाई थी। पिछले साल कोटद्वार में डेंगू से कई लोग संक्रमित हुए थे। यही वजह है कि नगर निगम प्रशासन ने इसके लिए अभी से कसरत शुरू कर दी है। नगर आयुक्त पीएल शाह ने अधिकारियों की बैठक लेकर उन इलाकों पर ज्यादा फोकस करने के लिए कहा है, जहां पिछले वर्ष बहुत ज्यादा डेंगू के केस मिले थे। नगर आयुक्त पीएल शाह ने बताया कि वार्डों में फागिग की जा रही है। जब तक आयवश्यकता होगी तब तक फागिग लगातार कराई जायेगी। साथ ही बंद पड़ी नालियों की भी सफाई कराई जा रही है। इसके अलावा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। कूड़ा वाहनों में अब कुछ समय के लिए स्वच्छता के बजाय डेंगू और मलेरिया संबंधी गाने चलाये जायेगें। उन्होंने बताया कि नगर निगम की प्राथमिकता है कि बरसात के समय जलजनित बीमारियां न फैले।
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. जेसी ध्यानी ने कहा कि वर्तमान में डेंगू के केस नहीं है। बरसात में डेंगू के मरीजों की संभावना बढ़ जाती है। इसका मच्छर साफ पानी में पैदा होता है। लोगों को इससे बचने के लिए बस इस बात का ध्यान रखना है कि घर और आसपास सफाई रखें। कहीं पर भी पानी अधिक समय तक न भरा रहने दें। जहां कहीं पर पानी हो वहां दवा आदि का छिड़काव करायें। यदि किसी को कमजोरी, जोड़ों में दर्द जैसी बुखार के दौरान शिकायत होती है तो वह किसी भी दशा में दर्द की दवा बिना डाक्टर की सलाह के न लें। डेंगू और मलेरिया रोग किसी न किसी माध्यम से फैलते हैं। बरसात में पानी इकट्ठा होने से मच्छरों के लार्वा पनपने लगता है। इससे बीमारी बढ़ने लगती हैं। डेंगू के लक्षणों के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है। क्योंकि इससे प्लेटलेट्स घटने लगती हैं। इससे आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है और मृत्यु हो सकती है। इसलिए लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीक के किसी स्वास्थ्य केन्द्र पर दिखाना चाहिए। डेंगू के लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसकी तत्काल जांच कराकर इलाज कराना चाहिए। डॉक्टर ने बताया कि बरसात के समय फुल स्लीव कपड़े पहनने चाहिए, ताकि मच्छर काट न सके।

इकट्ठा नहीं होने दें पानी
मॉनसून में मच्छर के पनपने की सबसे अनुकूल परिस्थिति होती है, इसलिए मॉनसून में मच्छरों से अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है। डेंगू का मच्छर अन्य मच्छरों की तुलना में काफी अलग होता है। मच्छरजनित एवं संचारी रोगों से बचाव के लिए कूलर में ज्यादा समय तक पानी इकट्ठा नहीं होने दें। कूलर व टूटे-फूटे पड़े प्लास्टिक के बर्तनों में इकट्ठा पानी को बार-बार निस्तारित करते रहें। पानी इकट्ठा रहने वाले स्थान पर सप्ताह में एक बार जले मोबिल का छिड़काव जरूर करें। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना चाहिए।

एडीज मच्छर के कारण होता है डेंगू
मादा एडीज मच्छर के कारण डेंगू फैलता है। एडीज मच्छर दिखने में अन्य मच्छरों से बहुत ही अलग होता है। इस मच्छर के शरीर पर चीते जैसी धारियां बनी होती हैं। अन्य मच्छरों की तरह यह मच्छर रात में नहीं, बल्कि दिन में अधिक काटते हैं। इसलिए इस मच्छर से बचने के लिए सुबह और दिन के समय अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है। मादा एडीज मच्छर ज्यादा ऊंचाई तक उड़ नहीं सकती हैं। इनके उड़ने की क्षमता इंसानों के घुटनों तक ही होती है, इसलिए अपने शरीर के साथ-साथ पैरों को जरूर कपड़ों से ढककर रखें। यह मच्छर गंदी नालियों के पानी में नहीं, बल्कि साफ-सुथरे पानी में पनपते हैं, इसलिए अपने आस-पास साफ पानी को भी इकट्ठा ना होने दें। साफ-सुथरे शहरी इलाके के लोगों को डेंगू के मच्छर अधिक प्रभावित करते हैं।

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