दिल्ली,पुणे शहरों की तरह दून की पुलिसिंग को आधुनिक संसाधनों से पूर्ण करे सरकार

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देहरादून। राजधानी में बिगड़ती कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा आयोजित संवाद में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने कई ठोस सुझाव दिए। वक्ताओं ने दिल्ली, पुणे, हैदराबाद और झांसी जैसे शहरों की तर्ज पर स्मार्ट पुलिसिंग की अवधारणा लागू करने पर जोर दिया। इसमें पुलिस को सख्त, संवेदनशील, आधुनिक, मोबाइल सतर्क, जवाबदेह, विश्वसनीय और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित बनाने की बात कही गई।
संवाद में अपराधियों पर खौफ पैदा करने के लिए केवल मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के निर्देशों को अपर्याप्त बताया गया। शराब सेवन को नियंत्रित करने के लिए बार, होटलों और रिसॉर्ट्स को रात 10 बजे तक बंद करने का सुझाव दिया गया। शिक्षण संस्थानों और छात्रावासों में नशीले पदार्थों के बढ़ते चलन पर चिंता जताते हुए प्रबंधकों और मकान मालिकों की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठी।
वक्ताओं ने राजधानी में बाहरी लोगों का सौ प्रतिशत सत्यापन, 24 घंटे पुलिस पेट्रोलिंग, शिक्षण संस्थानों के बाहर लोकल इंटेलिजेंस पुलिस की निगरानी और कॉलोनियों में सीसीटीवी व मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू करने पर बल दिया। यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए बड़े स्पीड डिस्प्ले बोर्ड लगाने और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के लाइसेंस रद्द करने का सुझाव दिया गया।
संवाद में यह भी कहा गया कि राज्य की भूस्थितिकी और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए पर्यटन पर नियंत्रण जरूरी है। पुलिस विभाग में कार्मिकों और आधुनिक संसाधनों की कमी को भी बिगड़ती स्थिति का कारण बताया गया। कुल मिलाकर, नागरिकों ने पुलिस और प्रशासन से मिलकर राजधानी में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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