ऋषिकेश। कुनांऊ गांव में ईको विकास समिति कुनांऊ की ओर से शुक्रवार को बैठक आयोजित कर स्थानीय ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण के लिए मालू के पत्तों से पत्तल और दोने बनाने की मुहिम शुरू करने पर चर्चा की गई। सेवानिवृत्त मेजर सुरेश पयाल के नेतृत्व में हुई बैठक में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और ग्रामीण आजीविका के अवसर विकसित करने पर जोर दिया गया। पयाल ने कहा कि मालू के पत्तों से बने पत्तल-दोने उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति का हिस्सा रहे हैं और शादी-विवाह, चूड़ाकर्म, पूजा, श्राद्ध व भोग-प्रसाद में इनका इस्तेमाल होता था। डिस्पोजेबल सामग्री के बढ़ते चलन से यह परंपरा विलुप्ति की ओर है। उन्होंने गांवों के आसपास मालू का बड़े स्तर पर रोपण करने का सुझाव दिया, जिससे कच्चा माल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा, लागत घटेगी और जंगलों पर दबाव कम होगा। उन्होंने कहा कि मालू, तिमला और भोजपत्र उत्तराखंड की प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पयाल ने बताया कि बीते बृहस्पतिवार को देहरादून में वन्यजीव सप्ताह के शुभारंभ कार्यक्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री और वनमंत्री के समक्ष पर्यावरण अनुकूल स्वरोजगार से जुड़े ये सुझाव भी रखे थे।