महिलाओं ने दी थड़िया, चौफला और झुमेला पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुति

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-महिला मंगल दल और जागृति समिति पौड़ी की बुजुर्ग महिलाओं ने दी प्रस्तुति
जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी। महिला मंगल दल और जागृति समिति पौड़ी गांव की बुजुर्ग महिलाओं की ओर से बसंत पंचमी से हर रोज शाम को गांव में आयोजित हो रही मांगल गीत की श्रृखंला बैशाखी को भी आयोजित की गई। इस दौरान महिलाओं ने थड़िया, चौफला व झुमेलो आदि पारंपरिक लोक नृत्य भी प्रस्तुत किए।
बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी पंरपराओं का संरक्षण व युवा पीढ़ी को उसके प्रति आकर्षित करना है। पौड़ी गांव में जागृति समिति की ओर से हर साल बसंत पंचमी से बैशाखी तक मांगल गीतों की श्रृखंला आयोजित की जाती है। जिसके तहत हर रोज शाम को गांव में महिलाओं की ओर थड़िया, चौफला व झुमेलो आदि पारंपरिक लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी जाती है। समिति की अध्यक्ष कमला नेगी ने बताया कि वर्ष 2004 से समिति इस श्रृखंला का आयोजन कर रही है। इसके तहत हर वर्ष बसंत पंचमी से बैशाखी तक समिति की सदस्य मांगल गीतों का गायन करती हैं। बताया कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति व परंपराओं से दूर होती जा रही है। युवा भौतिकवादी पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं। जो कि हमारे लिए नुकसानदायक है। कहा कि हमारी पहचान उत्तराखंड की विशिष्ठ परंपराएं हैं। जिनसे हम पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखते हैं। समिति की सदस्य पवित्रा देवी, सुलोचना देवी, पप्पू देवी ने कहा कि उनका प्रयास है कि वह अपनी परंपराओं को बचा कर रख सकें। नई पीढ़ी को इन पंरपराओं से अवगत करा सके। इन महिलाओं ने युवा पीढ़ी से अपनी परंपराओं व संस्कृति की ओर लौटने की अपील भी की। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में मांगल गीतों के गायन के साथ ही झुमेलों भी किया। इसके साथ ही ओम ज्योति ज्वाला कीर्तन मंडली ने भी शानदार गीतों की प्रस्तुति दी। महिलाओं ने यहा मौजूद ग्रामीणों को टीका लगाकर पकवान भी खिलाए। इस मौके पर बसंती रौथाण,देवेश्वरी देवी, सुलोचना देवी, बसंती देवी, सावित्री देवी, विमला देवी, शकुंतला देवी, कांती देवी, राखी नेगी, सीरा देवी, कल्पना रौथाण, दुर्गा रावत, प्रतिभा देवी आदि शामिल थे।

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