नईदिल्ली, दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में सोमवार को हुई विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी को बड़ा समर्थन मिला है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से अपने ही नेताओं से आलोचनाओं का सामना कर रही बनर्जी का गठबंधन के दलों ने जोरदार बचाव किया और चुनाव में भाजपा द्वारा धांधली कर सत्ता हासिल करने का आरोप लगाया।बैठक की चर्चाओं से परिचित नेताओं ने बताया कि बनर्जी ने गठबंधन के सहयोगियों से कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा धांधली से प्रभावित था। इसके बाद भी भाजपा शानदार जीत हासिल कर इतिहास रचे जाने का ढोल पीट रही है। इस पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने तुरंत बनर्जी का समर्थन किया और कहा, 60 प्रतिशत नहीं, 100 प्रतिशत। इस पर बैठक में मौजूद अधिकतर नेताओं ने भी सहमति जता दी।
टीएमसी और कांग्रेस के बीच कड़वाहट की बातों को खत्म करने के उद्देश्य से सोनिया गांधी ने बनर्जी को शेरनी करार दिया। यह बस बात का संदेश था कि विपक्षी गठबंधन टीएमसी प्रमुख के साथ मजबूती से खड़ा है। सूत्रों के अनुसार, बनर्जी को गठबंधन सहयोगियों का पूरा समर्थन मिला और नेताओं ने तर्क दिया कि चुनावी प्रक्रियाओं के बारे में उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को राज्य-विशिष्ट शिकायत के बजाय एक सामूहिक विपक्षी अभियान में बदलने की आवश्यकता है।
बैठक में सबसे प्रभावशाली हस्तक्षेपों में से एक जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से आया। उन्होंने तर्क दिया कि विपक्षी दलों को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर अधिक ध्यान देने और उन्हें निरंतर राजनीतिक अभियानों में बदलने की आवश्यकता है। अब्दुल्ला ने कहा, हमें उनके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों से सीखने की जरूरत है। सीजेपी को इसे यूं ही नहीं ले जाने देना चाहिए।
बैठक में चुनावी मुद्दों पर एकजुटता तो प्रदर्शित हुई, लेकिन सहयोगियों ने कांग्रेस के खिलाफ भी जमकर मुंह खोला। वामपंथी दलों ने कहा कि केरल चुनाव अभियान में कांग्रेस नेताओं ने उन पर भाजपा की आलोचना से मिलती-जुलती भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया। राहुल ने चिंता को स्वीकार किया, लेकिन अपने कुछ बयानों का बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस को अपनी राज्य इकाइयों के विचारों और राजनीतिक मजबूरियों पर भी विचार करना होगा।
क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने कांग्रेस से सहयोगियों के साथ व्यवहार में अधिक संयम बरतने और उन राज्यों में अनावश्यक टकराव से बचने का आग्रह किया जहां विपक्षी दल आपस में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इस तरह से गठबंधन मजबूत हो सकेगा।
गठबंधन के भीतर स्पष्ट तनाव के बीच बैठक हुई। डीएमके ने बैठक में भाग नहीं लिया, केरल में कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच तनाव अभी भी अनसुलझा रहा। हालांकि, इसके बाद भी नेता एकता प्रदर्शित करने के लिए दृढ़ संकल्पित दिखाई दिए। राहुल ने सहयोगी दलों को सुलह का संदेश देते हुए गठबंधन के भीतर प्रेम और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। कांग्रेस नेताओं ने सहयोगियों को आश्वासन दिया कि भविष्य में बेहतर समन्वय तंत्र स्थापित किए जाएंगे।
बैठक में मौजूद सभी लोगों को एकजुट करने वाली बात यह थी कि चुनावी मुद्दे गठबंधन का सबसे बड़ा राजनीतिक आधार बन सकते हैं। बनर्जी के दावों, राहुल की प्रतिक्रिया और अब्दुल्ला के हस्तक्षेप को लेकर हुई चर्चा ने इस व्यापक सहमति को जन्म दिया कि विपक्ष को मतदाता सूचियों, चुनाव प्रबंधन और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दों पर अधिक आक्रामक रूप से अभियान चलाना चाहिए। इन बातों पर सभी नेता एकजुट नजर आए।
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