उत्तराखंड की जनजातियां एवं राष्ट्रीय सुरक्षा विषय वेबिनार सम्पन्न
जयन्त प्रतिनिधि।
थलीसैंण : राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय थलीसैंण के इतिहास, भूगोल, सैन्य विज्ञान के संयुक्त तत्वावधान में उत्तराखंड की जनजातियां एवं राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का सफल आयोजन किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. योगेन्द्र चन्द्र सिंह ने कहा है कि तिब्बत और भारत के बीच का व्यापार मुख्य रूप से भोटिया जनजाति द्वारा नियंत्रित था। यह व्यापार वस्तु-विनिमय पर आधारित था, जिसमें ऊंचे हिमालयी दर्रों को पार करके स्थानीय उत्पादों का आदान-प्रदान किया जाता था। यह प्राचीन व्यापार सामरिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से अत्यधिक महत्वपूर्ण था। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित नीति और माणा घाटियों का तिब्बत व्यापार में महत्वपूर्ण स्थान था।
वेबिनार का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. योगेन्द्र चन्द्र सिंह, उच्च शिक्षा निदेशक, उत्तराखण्ड प्रो. वी. एन. खाली द्वारा सरस्वती माता के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस मौके पर प्रो. बी.आर पंत ने कहा कि उत्तराखंड की जनजातियां हिमालयी और तराई क्षेत्रों की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का प्रतिनिधित्व करती हैं, राज्य में मुख्य रूप से थारू, जौनसारी, भोटिया, बोक्सा और राजी जनजातियां निवास करती है। ये जनजातियां अपनी विशिष्ट बोलियों, पारंपरिक वेशभूषा, मेलों और कला-संस्कृति के लिए जानी जाती है। श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी परिसर ऋषिकेश से प्रो. दिनेश चंद्र गोस्वामी (डीन ऑफ आर्ट) ने कहा कि उत्तराखंड की जनजातियों का ‘जल, जंगल और जीवन’ से अटूट और गहरा संबंध रहा है। यहां के मुख्य आदिवासी समुदायों की आजीविका, संस्कृति और सामाजिक संरचना सदियों से इन्हीं प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रही है। इस मौके पर डॉ. भारती चौहान, डॉ. बचन सिंह, डॉ. प्रेम सिंह राणा, डॉ. विक्रम रोतैला, डॉ. विकास प्रताप सिंह आदि मौजूद थे।