पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का विकल्प तलाश रहा भारत, चीन के हॉटन मार्ग पर बातचीत

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नई दिल्ली ,पाकिस्तान की ओर से भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगातार बढ़ाए जाने के बीच भारत वैकल्पिक हवाई मार्ग तलाश रहा है। इसी क्रम में भारत चीन के साथ शिनजियांग क्षेत्र के ऊपर से भारतीय विमानों के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने को लेकर बातचीत कर रहा है। प्रस्तावित मार्ग चीन के पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र में स्थित हॉटन के आसपास से गुजर सकता है। दोनों देशों के बीच इस विषय पर करीब एक वर्ष से बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है।
नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने भी भारत पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद रहने से उत्पन्न समस्या को कम करने के लिए चीन के साथ हॉटन मार्ग को लेकर बातचीत कर रहा है। विदेश मंत्रालय इस संबंध में चीनी अधिकारियों के संपर्क में है। प्रस्तावित मार्ग को लेकर अंतिम निर्णय चीन की अनुमति और संबंधित हवाई यातायात व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा।
पाकिस्तान के हवाई अड्डा प्राधिकरण ने भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर लागू प्रतिबंध को एक बार फिर बढ़ा दिया है। विमान परिचालन संबंधी सूचना (नोटम) के अनुसार, प्रतिबंध अब 24 अक्टूबर 2026 को सुबह 4 बजकर 59 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इससे पहले यह प्रतिबंध 24 सितंबर को समाप्त होना था। यह प्रतिबंध भारतीय पंजीकृत विमानों के साथ-साथ भारतीय विमानन कंपनियों द्वारा संचालित, स्वामित्व वाले या पट्टे पर लिए गए विमानों तथा सैन्य उड़ानों पर भी लागू है।
भारत और पाकिस्तान के बीच हवाई क्षेत्र से जुड़ी यह पाबंदी अप्रैल 2025 से चली आ रही है। इसके कारण भारतीय विमानन कंपनियों को पाकिस्तान के ऊपर से जाने वाले मार्गों के बजाय वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। विशेष रूप से भारत से यूरोप और उत्तरी अमेरिका की ओर जाने वाली लंबी दूरी की उड़ानों पर इसका असर पड़ा है।
पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से बचने के लिए भारत से पश्चिमी देशों की ओर जाने वाली कई उड़ानों को अरब सागर की ओर से लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इससे उड़ान की अवधि और ईंधन की खपत बढ़ सकती है। लंबी दूरी के मार्गों पर इसका विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर भी असर पड़ रहा है।
ऐसे में चीन के शिनजियांग स्थित हॉटन के ऊपर से संभावित मार्ग को एक वैकल्पिक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस मार्ग से कुछ पश्चिमी और उत्तरी दिशा की लंबी दूरी की उड़ानों को मौजूदा दक्षिणी मार्ग की तुलना में कम दूरी तय करनी पड़ सकती है। हालांकि, संभावित बचत कितनी होगी, यह मार्ग की अंतिम रूपरेखा और चीन की ओर से दी जाने वाली अनुमति पर निर्भर करेगा।
चीन के साथ प्रस्तावित मार्ग को लेकर बातचीत अभी प्रारंभिक स्तर पर है। हॉटन क्षेत्र का भूगोल, ऊंचे पर्वतीय इलाके, आपात स्थिति में विमानों की सुरक्षित निकासी और वैकल्पिक हवाई अड्डों की उपलब्धता जैसे मुद्दे इस मार्ग के परिचालन में महत्वपूर्ण होंगे। इसके अलावा, संबंधित हवाई क्षेत्र की सैन्य संवेदनशीलता और भारत-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे भी बातचीत को प्रभावित कर सकते हैं।

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