नई दिल्ली, ,। भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास में कोयला खनन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने खनन कार्यों के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी भूमिगत और खुली दोनों तरह की खदानों में पारंपरिक तकनीकों से आगे बढ़ते हुए उन्नत उपकरणों, स्वचालन और डिजिटल तकनीकों को तेजी से अपना रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से खनन जोखिम कम करने, कोयला रिकवरी बढ़ाने, पूर्वानुमानित रखरखाव और स्मार्ट खदानों के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अन्वेषण में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल
संसाधनों की पहचान के लिए कोर ड्रिलिंग के साथ 2डी और 3डी भूकंपीय सर्वेक्षण जैसी गैर-आक्रामक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे बोरहोल की संख्या में 50 प्रतिशत तक कमी लाने और संसाधन निर्धारण की दक्षता बढ़ाने में मदद मिल रही है। स्पेक्ट्रल एनहांसमेंट विश्लेषण के साथ मशीन लर्निंग तकनीकों का इस्तेमाल गामा-रे, घनत्व और प्रतिरोधकता लॉग से कोयला सीमों की व्याख्या में किया जा रहा है।
केंद्रीय खनन एवं योजना डिजाइन संस्थान (सीएमपीडीआई) खनन-पूर्व, खनन और खनन-पश्चात गतिविधियों में दूरसंवेदी तकनीक, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), लिडार, ड्रोन और जल-गहराई सर्वेक्षण का उपयोग कर रहा है। सीआईएल ने खदान निगरानी और पर्यावरण लेखापरीक्षा के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपग्रह भू-स्थानिक डैशबोर्ड विकसित करने के लिए राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) के साथ समझौता भी किया है।
खुली खदानों में उच्च क्षमता वाली मशीनें
खुली खदानों में सीआईएल धीरे-धीरे उच्च क्षमता वाली भारी अर्थमूविंग मशीनें (एचईएम) तैनात कर रहा है। इनमें 42 घन मीटर क्षमता वाले फावड़े, 240 टन क्षमता वाले डंपर, ड्रैगलाइन और विस्फोट-मुक्त खनन के लिए सरफेस माइनर शामिल हैं। इन मशीनों को वर्ष 2021 से मानकीकृत किया जा रहा है।
विस्फोट-मुक्त खनन तकनीक से धूल, शोर और कंपन कम होने के साथ-साथ कोयले की गुणवत्ता बेहतर होती है और कोयले की हानि भी घटती है। वर्ष 2024-25 में विद्युत डेटोनेटरों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर अधिक सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटरों का इस्तेमाल शुरू किया गया।
प्रमुख भारी मशीनों में ऑपरेटर की थकान की निगरानी, नजदीकी वस्तुओं की चेतावनी, 360 डिग्री कैमरे और स्वचालित आग पहचान एवं दमन जैसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुरक्षा सुविधाएं शामिल की जा रही हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिमुलेटर और आभासी वास्तविकता प्रशिक्षण के जरिए कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाई जा रही है। जीपीएस आधारित ट्रक डिस्पैच, पेलोड निगरानी और वाहन स्वास्थ्य निगरानी से खनन परिचालन की उपयोगिता में सुधार हो रहा है।
भूमिगत खनन में निरंतर खनन और लॉन्गवॉल तकनीक
सीआईएल भूमिगत खदानों से कोयला उत्पादन को लगभग 100 मिलियन टन तक बढ़ाने के लिए निरंतर खनन, लॉन्गवॉल और हाईवॉल तकनीक पर जोर दे रहा है। निरंतर खनन तकनीक को पहले ही अपनाया जा चुका है और अब बड़े पैमाने पर लॉन्गवॉल तकनीक लागू की जा रही है।